Thu. Feb 25th, 2021

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उत्तराखण्ड ऋषिगंगा मे आई आपदा हिमालय मे छेडछाड का नतीजा है, उलोवा

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उत्तराखण्ड लोक वाहिनी की बैठक में इस आपदा पर गहरा दुख ब्यक्त करते हुवे कहा गया कि जिस प्रकार हिमालय की कमजोर पहाडियो पर सैकडो बाँध प्रस्तावित है वह सम्पूर्ण उत्तर भारत के लिये खतरा है ।
वाहिनी के उपाध्यक्ष जंगबहादुर थापा की अध्यक्षता मे आयोजित बैठक मे , गढवाल के बांध बिरोधी आन्दोलनो मे सक्रिय रहे वाहनी के प्रवक्ता दयाकृष्ण काण्डपाल ने कहा कि पहाडो मे वर्फबारी व हिमस्खलन कोई नई बात नही है इसी बात को देश भर के बांध समर्थक लोगो को समझाने के लिये उ लो वा के पूर्व अध्यक्ष डा शमशेर सिह बिष्ट के नेतृत्व मे गढवाल मण्डल मे की गई पदयात्राओ मे उन्होने न बांधो के सम्भावित खतरो से लोगो को आगाह किया था गढवाल मण्डल मे बांध बरोधी आन्दोलनो मे लोगो ने जेल यातनाये भोगी पर सरकारो की समझ मे नही आया ।
एडवोकेट जगत रौतेला ने कहा कि बिष्णुप्रयाग ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट कुछ महिने पहले ही आरम्भ हुवा था किन्तु आज उसका नामोनिशान मिट गया है । यह जन व धन हानि बहुत ही दुखद है सरकारो को इस पर संज्ञान लेना चाहिये । तथा भविष्य मे हिमालयी क्षेत्रो मे प्रस्तावित परियोजनाओ पर पर्यावरण हितो केे ध्यान मे रखते हुवे रोक लगाई जानी चाहिये कुणाल तिवारी ने कहा कि गिर्दा ने पहले ही अपने गीत के माध्यम से पानी के ब्यापारियो को आगाह कर दिया था । अजयमित्र सिह बिष्च ने कहा कि वाहनी ने हमेशा पर्यावरण की चिन्ताओ को सपरार के लामने रखा है पर सरकारे इन तिन्ताओ के प्रति बेफिक्र नजर आती रही । पर्यावरण वादियो को विकास विरोधी कहने का एक चलन चल पडा है परिणाम सबके लामने है अन्त मे अध्यकषता कर रहे उ लो वा उपाध्यक्ष जंग बहादुर थापा ने कहा कि गढवाल मे मारे गये आपदा मे सभी मजगूपो रे प्रकि वह संवेदना प्रकट करते हुवे सरकार से मांग करते है कि भविष्य मे हिमालय के साथ छेडछाड ना करने की स्पष्ठ नीति बनाई जाृ । अन्त मे शोक संतप्त परिवारे के प्रति लंवेदना ब्यक्त करते हुवे मृतको को श्रद्धान्जली दी गई । इस अवसर पर बाँध बिरोधा आन्दोलन मे सक्रिय साथियो का चित्र भी दयाकृष्ण काण्डपाल ने सार्वजनिक किये

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