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यह भी जानियेः-भानूताप यंत्र के आविष्कारक अल्मोड़े के निवासी थे

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कूर्मांचल में जितने भी प्रतिभावान व मेधावी व्यक्तित्व अवतीर्ण हुये उनमें भानूताप के आविष्कारक श्रीकृष्ण जोशी का नाम अविस्मणीय है जिनका जन्म अल्मोड़ा नगर के मकेड़ी में 1864 में हुआ। उन्होंने भानूताप helotherm यंत्र से वर्ष 1900 में लखनऊ में वाष्प इंजन को चलाकर वैज्ञानिकों को नई राह दिखलायी थी। 15 मार्च 1900 को यह पेटेंट हुआ था जिसे भारत सरकार के गजट 31 मार्च 1900 में प्रकाशित किया गया। परिष्कृत भानूताप जनवरी 1903 में पेटेन्ट किया गया जिसे भारत सरकार के गजट 1 जनवरी 1903 में प्रकाशित किया गया। तब तत्कालीन विभिन्न समाचार पत्रों ने इस पर अपनी टिप्पणी प्रकाशित की
अल्मोड़ा अखबार 1900ः- पं0 श्रीकृष्ण जोशी ने भानू ताप यंत्र का आविष्कार किया है हमें यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि भानू ताप को कलकत्ता की औद्योगिक प्रदर्षनी में प्रदर्षित किया गया। अमृत बाजार पत्रिका (कलकत्ता) 1 जनवरी 1902 भानू ताप का भारत में आविष्कार होना एक महान उपलब्धि है जिसमें सम्भवतः भारत में ही नहीं बल्कि अन्य देशों के घरेलू व औद्योगिक क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन जा सकता है। बसुमत्ता कलकत्ता 1 जनवरी 1902 कलकत्ता की औद्योगिक प्रदर्शनी में जो जो भारत में निर्मित वस्तुएं प्रदर्षित की गयी है। उनमें भानूताप विषेष रुप से उल्लेखनीय है। बंगाली 3 जनवरी 1902 विज्ञान जगत के कथानक दिन प्रतिदिन प्रत्यक्ष रुप से दृष्टिगोचर हो रहे है। इनमें से मानव बुद्धि का एक आविष्कार भानूताप है। इण्डियन मिरर जनवरी 4 1902 जब हम कांग्रेस के संरक्षण में प्रथम बार आयोजित औद्योगिक प्रदर्षनी में आते है। जिसमें कई अदभूद वस्तुएं देखने को मिलती है परंतु यह चीज जो व्यापक आकर्षण की है। एक बहुत ही सीधा साधा पंरतु अत्युष्कृत आविष्कार है जिसमें विकास की अनेक सम्भावनाएं सनिहित है। हमारा संकेत उस उपकरण से है जिसके आविष्कारक अल्मोड़ा के पं0 श्रीकृष्ण जोशी है और जो उसे उस प्रदर्शनी में प्रदर्षित करा रहे है। इण्डियन मिरर 8 जनवरी 1902 इस प्रदर्षनी में कुछ मुख्य चीजे देखी जिसमें अल्मोड़ा के पं0 श्रीकृष्ण जोशी द्वारा बनाया गया भोजन बनाने का एक अत्यंत एक उत्कृष्ट उपकरण भी है। मद्रास स्टेण्र्ड जनवरी 16 1902 इस सम्बंध में हमें अल्मोड़ा के श्रीकृष्ण जोशी के प्रषंसनीय आविष्कार के विषय में कहना है इसे भानूताप की संज्ञा दी गई है। मरहटा जनवरी 12 1902 तथा ट्रिब्यूल जनवरी 1902 में टिप्पणियां प्रकाषित हुई श्रीकृष्ण जोशी ने एकस्व (patant) प्राप्त करने हेतु सन् 1899 में आवेदन पत्र किया था योग्य एवं विख्यात वैज्ञानिक कुछ काल पहले से सौर ऊर्जा को एकत्र करने के साधन जुटाने में संलग्न रहे है। जिससे घरेलू और उद्योग धंधो को चलाने के लिए किसी बाहृय ईधन की आवष्यकता न रहे।
पं0 श्रीकृष्ण जोशी भानूताप के निर्माण के पूर्व भाषाविद् तथा संगीत शास्त्री के रुप में प्रसिद्ध थे जून 1924 में उनका 60 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।

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