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यह भी जानिये:— स्वाधीनता संग्राम में शहीदों की स्मृति में हर वर्ष श्रृद्धांजलि अर्पित की जाती है

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यदि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा की जाय तो कुमाऊं के संग्रामियों की शौर्य गाथा के बिना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अधूरा सा लगता है। आजादी के बाद जो इतिहास लिखा गया उसमें कुमाऊं के संग्रामियों की शौर्य गाथा को उतना महत्व नहीं दिया गया जिसके हकदार वे थे वास्तविकता तो यह है कि कुमाऊं की पहाड़ियों में इतने लोग सन् 41—42 के भारत छोड़ो आंदोलन में जेल गये व शहीद हुए वह एक कीर्ति मान है। जनसंख्या के सापेक्ष जेल यातना का ऐसा रिकार्ड भारत के बिरले जिले ही बना सके इसमें तत्कालीन अल्मोड़ा जिला पिथौरागढ, बागेश्वर व चम्पावत सहित अग्रणीय रहा राष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम में अल्मोड़ा जनपद के सल्ट क्षेत्र का बड़ा योगदान रहा। भारत छोड़ो आन्दोलन के दौरान सन् 42 में 1 सितम्बर को कार्यकर्तागण खुमाड़ पहुंचे। 3 सितम्बर को इलाका हाकिम पाली पुलिस जत्थे सहित देघाट चौकोट में गोली चलाकर भिकियासैंण पहुंचा। सल्ट के पटवारियान ने रिपोर्ट की सल्ट में शान्ति है। 5 सितम्बर की प्रात: ही इलाका हाकिम पुलिस जत्थे तथा पटवारी, पेशकार व लेसन्सदारों आदि को साथ लेकर क्वैराला पहुंचे यह सूचना खुमाड़ भी पहुंच गई।
श्रीमो​ती राम उर्फ वणुवा राम पीपना ने चौराग्राम में सूचना यंत्र नरसिंगा बजाया। जिससे तमाम जनता को उनके आने की सूचना दी गई। ​सत्याग्रहियों की भीड़ खुमाड़ में एकत्र होने लगी। इलाका हाकिम ने सिपाहियों को चने भी नहीं चबाने दिये वे डगूला गांव में पहुंचे यहां चमकाना के लालमणि बूढे ने आकर समझाया किन्तु उसे रस्सी से बांधकर पुलिस वाले साथ में खुमाड ले गये और उन्हें काफी मारा पीटा। जनता के नेताओं से गिरफ्रतार होने को कहा उन्हें सत्याग्रहियों की भीड में नहीं आने दिया। खुमाड पहुंच कर पुलिस ने मोर्चा बांध लिया सामने खड़ी निहत्थी भीड के आगे की श्रीगंगादत्त शास्त्री थे। उन पर गोली चला दी गई दो सगे भाई गंगा राम, खीमानन्द पुत्र टीकाराम खुमाड घटना स्थल पर ही शहीद हो गये दो व्यक्ति चूणामणि व बहादुर सिंह महर व बद्रीदत्त पुत्र शंकर दत्त ग्राम पीपना चार दिन बाद स्वर्गवासी होकर शहीद हो गये अन्य पांच व्यक्ति सर्वनी गंगादत्त शास्त्री, मधुसूदन, गोपाल सिंह, बचे सिंह तथा नारायण सिंह घायल हो गये।
इसके पश्चात् मि0 जौनसन घायलों के पास आये और गांव खुमाड के माल गुजार पानदेव की धोती फाडकर पट्टी बाधंने लगे प्राण जाते हुए गंगा राम ने कहा कि मुझे मत हुए मैं स्वर्ग जा रहा हूं।
अल्मोड़ा जनपद के सल्ट तहसील के अंतर्गत खीमानन्द, गंगादत्त, चूणामणि, बहादुर सिंह, व बद्रीदत्त अंग्रेजों की गोली का शिकार हो कर शहीद हुए तब से प्रतिवर्ष पांच सितम्बर को खुमाड़ में इन शहीदों की याद में शहीद दिवस मनाया जाता है और अमर शहीदों को श्रृद्धांजलि अर्पित् की जाती है इसके साथ ही देघाट स्याल्दे ब्लाक में जनपद अल्मोड़ा में हरि कृष्ण व हीरामणि 1942 के आंदोलन में गोरी फौजों की गोली के शिकार होकर शहीद हुए।
इसी के साथ ही सन् 42 के आन्दोलन में 25 अगस्त को भारत छोड़ो आन्दोलन में सालम क्रान्ति के वीर सत्याग्रह नरसिंह धानक ग्राम चौकुना पट्टी सालम व टीकासिंह कन्याल ग्राम काण्डे पट्टी तल्ला सालम शहीद हुए थे इन शहीदों की स्मृति में प्रतिवर्ष 25 अगस्त को धामद्यो सालम में शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रृद्धांजलि अर्पित कर क्षेत्र की जनता उनको स्मरण करती है।

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