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आपदा— परिजनों के आंखों के आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे

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उत्तराखंड के जनपद चमोली के तपोवन एवं रैणी गांव में पिछले 07 फरवरी को आयी भीषण आपदा के बाद सरकार भी अपडेट होने की कोई कसर नहीं छोड़ रही है।
चमोली की जिलाधिकारी स्वामी एस भदौरिया के अनुसार तपोवन टनल में लगातार काम चल रहा है और बैराज साइट पर भी मशीन काम कर रही है। रैणी साइट पर भी काम चल रहा है। 14 फरवरी को रैणी से 7 शव तथा टनल से 6 शव बरामद हुवे और अभी तक 3 शव बरामद हो चुके है।
एसडीआरएफ की ओर से वाटर लेवल सेंसर और अलार्म सिस्टम लगाया जा रहा है। जिससे इन अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से नदी का जल स्तर बढ़ने से तुरंत ही अलार्म बज उठेगा और इस अलार्म की मदद से जिला प्रशासन को किसी आपदा में पहले ही बचाव के उपाय कर सकेंगे।
एक सप्ताह ​बीत जाने के बाद भी अभी तक 150 लोगों का कोई सुराग नहीं लग सका है। जबकि आपदा ग्रस्त क्षेत्र से अब तक 54 शव बरामद हो चुके है। जिनमें से 29 शवों की पहचान कर ली गयी है 25 शवों की पहचान की जानी है। लापता लोगों के सुराग नहीं होने परिजनों के आंखों के आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे हैं।
एनडीआरएफ,एसडीआरएफ,सेना,आईटीबीपी, बीआरओ आदि के जवान लापता लोगों को खोजने में कोई कमी कसर नहीं छोड़ रहे हैं। तबाही होने के तुरंत बाद से लोगों को बचाने का हर संभंव प्रयास किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने रैणी क्षेत्र में आई आपदा में लापता लोगों की तलाश के लिए अधिशासी अभियंता आरडब्ल्यूडी और तहसीलदार के नेतृत्व में एक टीम भी बनाई जा चुकी है, जो लापता लोगों की खोजबीन करने में जुटी हुई है। लेकिन, सुरंग के जमी गाद व मलबा राहत कार्य की रफ्तार को कम कर रहा है।

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