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डा0 नीलाम्बर जोशी

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शक्ति 03 फरवरी 1934 में प्रकाशित लेख
कुमांऊ के पुनरूत्थान के इतिहास में डा0 नीलाम्बर चिन्तामणि जोशी जी का नाम ऊंचा स्थान पावेगा। डा0 नीलाम्बर जोशी जी कूर्मांचल के उन गिने गिनाये नररत्नों में से हैं जो जमाने के बदले का इंतजार न कर स्वयं जमाने को बदलने में अग्रसर होते हैं। डा0 जोशी का जन्म उस घर में हुवा था जहां की शोभा राय बहादुर पंडित पीताम्बर जोशी जी तथा राय बहादुर पंडित बद्रीदत जोशी जी हैं। इसी घर में स्वर्गीय घनान्द जोशी जैसे प्रखर बुद्धि बालक ने जन्म लिया था। यह घर कुमांऊ के सामाजिक जगत में सदा सुधार वर्ग का पृष्ट पोषक रहा है।
डा0 जोशी जी ने छोटी उम्र में बीएसी पास कर लाहौर मेडिकल कालेज से एमबीबीएस की डिग्री ली। इसके बाद ही आपने सरकारी नौकरी कर ​ली। सन 1913 या 14 के लगभग आप अपनी गृहणी जो की कप्तान डा0 नीलाम्बर पंत की रायबहादुर की बहन थी तथा नवजात कन्या को लेकर जो कि इस एफए कर लेडी हार्जिस कालेज में डाक्टरी की ​शिक्षा प्राप्त कर रही है अमेरिका गये। वहां आपने चिर फाड़ में डक्टरी की डिग्री ली। पहले आप चमोली गढ़वाल में काम करते थे अमेरिका से लौटने से आप सरकारी नौकरी में हाथरस में काम करने लगे। यहां पर रहते आपने अच्छी ख्याति प्रा​प्त की। यूपी सरकार ने कई हजार के आले आपको दिये।

इसके बाद भरतपूर दरबार स्टेट सर्जन बनाकर आपको अपने यहां बुलाया। अंत में आपने सरकारी तथा स्टेट नौकरी को छोड़कर दिल्ली में प्रेक्टिस करने का निश्चय किया। दिल्ली में रहते चार ही वर्षो में आपने अच्छी ख्याति प्राप्त कर ली। आप उत्तरी भारत में एक अच्छे सर्जन गिने जाते हैं। दिल्ली में चादनी चोक में आपका दफतर और करौलबाग में आपका निजी अस्पताल है। डा0 जोशी जी रूपया पैदा करने की गरज से ही आपेरेशन नही करते प्रत्युत एक कलाविद की तरह आपको आपेरेशन करने मे दिलचस्पी है। आप एक सच्चे कलाकार की तरह काम को हाथ में आते ही उसमें तनमय हो जाते हैं। भारत वर्ष के विभिन्न् प्रांतों से गरीब अमीर सभी आपके पास इलाज के लिए आते हैं और सभी से एक ही तरह का व्यवहार आप करते हैं। इतना ही नहीं गरीब को समझाने बुझाने में शिक्षित सपन्न व्यक्ति की अपेक्षा आप का अधिक समय निकल जाता है। जब आप काम पर होते हैं तब नींद भूख सब भूल जाते हैं।
आपके पास कीमती आपेरेशन के आले, डाक्टरी डिग्ररियां, सुंदर अस्पताल, रोगी की सेवा के लिए दायियां जैसे की बड़े डाक्टरों के यहां दिखलायी देती हैं सब कुछ है। इसके ​अति​रिक्त विशेष बात जो दूसरे डाक्टरों के यहां ​नहीं पायी जाती और जो आप में मौजूद है वह उदारता। आप अमीर की अपेक्षा गरीब की बात पर अधिक ध्यान देते हैं। इतना ही नहीं आप ​दीन—हीन जनों के इलाज में पले का का पाई पैसा में खर्चते हैं। आप सामाजिक संकीर्णता के कटर विरोधी हैं।
आप गुरूडम, भेडिया घसाना और मिथ्या रूढ़िवाद के स्थान पर बुद्विवाद का राज्य चाहते हैं। स्त्री शिक्षा को आप महत्व देते हैं। अपनी लड़की कुमारी नीमला जोशी को बड़ी उम्र तक कुमारी रख कर डाक्टरी शिक्षा दिलाना आपका ही साहस है। पंडित शिवदत्त पाण्डे अपनी विधवा कन्या को बड़ी उम्र में अंग्रेजी तथा डाक्टरी की शिक्षा लेने भेजा था। पाण्डे की कन्या आज हल्द्वानी में डाक्टरनी का कार्य कर रही हैं। इधर जोशी जी ने कुमारी सु0 संघ को वचन दिया था कि वो दो विधवों को अपने खर्च से शिक्षा देने तत्पर हैं। डा0 जोशी जी का उदारता का बहुतेरेजन अनुचित लाभ उठाने का प्रयत्न करते हैं। पर उन्हे खूब समझ लेना चाहिए कि इतना बड़ा डाक्टर मनोविज्ञान के ज्ञान से शून्य नहीं है। आपके सामने बनना महज बेवकूफी है।
संक्षेप में डाक्टर जोशी जी अपने पेश में निपुण है। समाज के मध्य निर्भीक् विचारने तथा सच्चाई तथा न्याय के साथ जीवन पथ में आगे बढ़ने की हिम्मत आप में है। आप अपने उच्च सिंद्धात
तथा आदर्शों के विरूद्ध खुदा की तक परवाह नहीं करने वाले नहीं। ओछी बात बात ओछे वातावरण से आपको​ घिन है।
-साभार मोती राम त्रिपाठी…….

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