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सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में कुमांउनी भाषा के पठन पाठन हेतु शिक्षकों की नियुक्ति के किये जायेगे प्रयास— कुलपति प्रो0 नरेंद्र भंडारी

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स्थानीय राजकीय संग्रहालय में चल रहे कुमांउनी भाषा सम्मेलन का शुभारंभ सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में के कुलपति प्रो0 नरेंद्र भंडारी ने कहा कि कुमांउनी के विकास हेतु हमें निचले स्तर से कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने सम्मेलन में यह विश्वास दिलाया कि वे सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय में में कुमांउनी भाषा के पठन पाठन हेतु शिक्षकों की नियुक्ति का प्रयास करेंगे तथा शासन से विश्वद्विद्यालय में गढ़वाल विश्वविद्यालय में की भांति कुमांउनी भाषा विभाग खोलने का प्रस्ताव शासन के समक्ष रखेगे।
सम्मेलन में नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी ने कहा कि कुमांउनी साहित्यकारों को अपनी रचनाओं से लोगों को अपने स्वास्थ्य व योग के प्रति जागरूक करना चाहिए।
इस अवसर पर डा0 कपिलेश भोज ने कहा कि जब तक हमारी सरकार व हमारे शिक्षण संस्थान कुमांउनी भाषा के विकास हेतु आगे नहीं आते तब तक कुमांउनी का विकास संभव नहीं हो सकता। हमारी सरकार विद्यालयों व विश्वविद्यालों को इस दिशा में यथाशीघ्र् कार्य करने की जरूरत है। सम्मेलन का संचालन पहरू के संपादक हयात सिंह रावत ने करते हुवे कहा कि जब उत्तराखंड की भाषा संस्कृति संबंधी अकादमियों को जागने की जरूअत है। सम्मेलन को नवीन बिष्ट पत्रकार, अल्मोड़ा अर्बन कापेरिटव बैंक के अध्यक्ष आनंद बग्डवाल तथा साहित्यकार त्रिभुवन गिरी ने भी संबोधित किया।
सम्मेलन में डा0 ​ललित जलाल, ललिता बिष्ट, तफज्जुल खान आनंद बल्लभ लोहनी, महेंद्र ठकुराठी, शिवदत्त पाण्डे, कृष्णमोहन बिष्ट, जे सी दुर्गापाल, नवीन चंद्र जोशी, नीमल नेगी, शिवराज बनौला, डा0सजीव आर्या, द्धिविजय सिहं बिष्ट, प्रमोद नेगी, चंदन नेगी, पी सी तिवारी, माया पंत, नवीन चंद्र पाठक, प्रताप सिंह, मीनू जोशी, राजेंद्र रावत, डा0 चंद्र प्रकाश फलेरिया, डा0 नवीन भटट, भास्कर भौर्याल, शंकर दत्त पाण्डे, शशि शेखर, रूप सिंह बिष्ट, आदि साहित्य प्रेमी मौजूद थे।

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