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पिथौरागढ़ की कुमौड़ की प्रसिद्ध हिल जात्रा

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​पिथौरागढ़ की कुमौड़ की प्रसिद्ध हिल जात्रा लखियाभूत की एक झलक पाने के लिए बुधवार के अपराह्न हजारों लोगों की भीड़ जुटी इतिहास कारों का मानना है कि शोर में हिलजात्रा लाने का श्रेय चार वीर महर भाईयों को जाता है किमवदन्तियों के अनुसार एक बार में ही भैंसे की बलि दी जाती थी। लेकिन ऐसा करने की कोई हिम्मत नहीं जुटा पाया महर भाईयों ने राजा से अनुमति मांगी राजा ने अनुमति दे दी। एक भाई ने ऊंचे स्थान पर चढ़कर भैंसे को घास दिखाई और उसने जब घास खाने को मुंह ऊपर किया। तो दूसरे भाई ने नीचे से खुखरी से वार कर भैंसे की गर्दन उड़ा दी। तब राजा ने प्रसन्न होकर उत्सव शुरु किया। हिलजात्रा के सम्बंध में एक वीर गाथा भी प्रचलित है कहा जाता है कि जब चारों भाई सोरघाटी पहुंचे तो उस समय वहां पर एक नरभक्क्षी शेर का आतंक छाया था। राजा पिथौराशाही ने हिंसक शेर को मारने वाले को मुंह मांगा पुरुस्कार देने की घोषणा की। चारों भाईयों ने नरभक्क्षी शेर को मार डाला राजा ने मन माना पुरुस्कार मांगने को कहा। कहा जाता कि बड़े भाई ने चण्डाक चोटी पर खड़े होकर कहा कि यहां से जितनी भूमि दिखाई दे रही है वह मुझे दे दिया जाए राजा ने पुरा क्षेत्र उन्हें दे दिया। कुमोड़ का नाम तभी से प्रसिद्ध हुआ।

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