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(चौथी कड़ी…..) क्यों हुई बद्रेश्वर की रामलीला बंद—पढ़े पूरा विवरण

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श्री हरगोविंद पंत ने यह भी कहा कि धारा 144 का अनुचित प्रयोग किया गया है और इस हुक्म को वापस ले लिया जाय। अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने इस विषय सम्बंधी अपना वकतव्य दिया इसके उपरांत कमेटी के सदस्यों ने अपने सुझाव उ​पस्थित किए और श्री जोशी जी से प्रार्थना की गई ​कि वे आवश्यकीय आज्ञा दे दें परंतु उनका कहना था कि वे बद्रेश्वर के स्वामी है। और जब त​क रामलीला कमेटी उन्हें निर्विवाद रुप से बद्रेश्वर का स्वामी स्वीकृत नहीं करती वे किसी प्रकार से रामलीला करने नहीं देंगे। रामलीला कमेटी की ओर से यह भी सुझाव उपस्थित किया गया कि इस मामले का निर्णय किसी पंच द्वारा करवा लिया जाय या श्री जोशी जी यह घोषित कर दें कि बद्रेश्वर में प्रतिवर्ष बिना किसी रोक—टोक के हमेशा रामलीला होती रहेगी तो कमेटी जोशी जी को ही स्वामी मान लेगी। परंतु मुन्तजिम सा​हब किसी भी सुझाव पर रजामंद नहीं हुए और अंत में अधिकारी वर्ग ने ही उनसे हाथ जोड़कर प्रार्थना कि वे बद्रेश्वर में रामलीला करने दे परंतु वे कायदे आजम की तरह अपनी अकड़ पर अड़े रहे। इस पर अधिकारी वर्ग से प्रार्थना की गई कि वे दफा 144 की आज्ञा वापस ले लें और श्री जोशी जी के लिए यह विकल्प छोड़ दें कि वे अपने अधि​कारों के विषय कानूनी कार्यवाही कर लें। उस बीच श्री देवी दत्त पंत ने सूचित किया कि नगर में जो अफवाह फैलायी गई थी कि प्रीमियर साहब ने इस सम्बंध में अपने विचार श्री जोशी के ​कनिष्ट भाई श्री नवीन चन्द्र जोशी को व्यक्त कर दिये थे और सभापति ने जब नवीन चन्द जोशी से यह विचार जानने चाहे तो उन्होंने यही कहा कि उनका आदेश है कि मामला शान्तिपूर्ण उपायों से सुलझा दिया जाय और रामलीला बद्रेश्वर में हो परंतु श्री जगदीश चन्द्र जोशी ने उपस्थित सज्जनों को सूचित किया कि माननीय पंत जी का आदेश है कि रामलीला कमेटी श्री जोशी जी को बद्रेश्वर का पूर्ण रुप से स्वामी स्वीकृत करें और आश्वासन दे कि वहां रावण नहीं जलाया जाएगा। वहां के फड़ों का किराया जोशी जी को दे दिया जायगा व बद्रेश्वर की टूट फूट की मरम्मत रामलीला कमेटी करेगी। श्री जगदीश चन्द्र जोशी जी के मुंह से पंत जी का यह कथित आदेश सुनकर सभी उपस्थित सज्जन आश्चर्य चकित रह गये। क्योंकि कुछ ही देर पहले माननीय पंत जी के अभिन्न मित्र श्री हरगोविंद पंत ने उनके विचार प्रकट कर दिये थे। अंत में वाद विवाद से किसी निर्णय पर न पहुंचने पर शिष्टमण्डल ने श्री हरगोविंद पंत को अपना एक मात्र प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया और पुन: अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट श्री पंत जी व श्री जोशी जी के मध्य इस विषय पर वार्तालाप हुआ। श्री पंत जी ने श्री जोशी को बिना किसी शर्त के उनकी इच्छा अनुकूल आज्ञा प्राप्त करने के लिए पत्र लिखना स्वीकृत कर दिया परंतु फिर भी जोशी जी संतुष्ट न हुए और उन्होंने अधिकारी वर्ग को सूचित कर दिया कि यदि 144 हटा दी गई तो वे अपनी शक्ति का प्रयोग करेंगे और बद्रेश्वर में किसी को नहीं घुसने देंगे। ऐसी अवस्था में 2 बजे दिन के शिष्टमण्डल अ0जि0मै0 साहब के बंगले से वापस आ गया। इस विवाद से कई बातों पर प्रकाश पड़ा। ऐसा मालूम होता था कि यदि स्थानीय अधिकारी वर्ग के हाथ में ताकत होती तो वे सम्भवत: दफा 144 वापस ले लेते।
शेष अगली कड़ी में……..

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