Thu. Feb 25th, 2021

शक्ति न्यूज अल्मोड़ा |

1918 से प्रकाशित शक्ति अखबार का डिजीटल प्लेटफार्म

शरद पूर्णिमा के दिन पृथ्वी पर घर-घर जाकर भक्तों को आशीर्वाद देती माता लक्ष्मी, जानें रहस्यमय तर्क

1 min read
Slider

शरद पूर्णिमा जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूरे साल में केवल इसी दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिंदू धर्म में इस दिन कोजागर व्रत माना गया है, इसको कौमुदी व्रत भी कहते हैं | मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और अपनी किरणों से अमृत की बूंदें पृथ्वी पर गिराता है शरद पूर्णिमा के दिन रात को खुले आसमान के नीचे चावल की खीर बनाकर रखी जाती है। इसके अतिरिक्त एक प्रसंग यह भी आता है कि शरद पूर्णिमा की रात को देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और घर-घर जाकर यह देखती हैं कि कौन रात को जाकर प्रभु का स्मरण कर रहा है , इसीलिए इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा कहा जाता है। कोजागरी का अर्थ है -कौन जाग रहा है?

शास्त्रों के अनुसार शरद पूर्णिमा की तिथि पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट रहता है तथा रात को चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुणों की मात्रा सबसे अधिक होती है जो मनुष्य को हर तरह की बीमारियों से छुटकारा पाने में मददगार होती है। चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होने के कारण शरद पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर उसे खुले आसमान के नीचे रखा जाता है ,रात भर खीर में चंद्रमा की औषधीय किरणें पडने से खीर में औषधीय गुण आ जाते हैं |जिसे खाने से स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसी भी मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के ही दिन भगवान श्री कृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के संग महारास रचाया था। इसी वजह से भी शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की तिथि पर देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने आती हैं और घर-घर जाकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं शरद पूर्णिमा की रात को साधकों को श्री सूक्त तथा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए शरद पूर्णिमा पर देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कमलगट्टे की माला से ऊँ श्रीं ह्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मै नम: मंत्र का जाप करना चाहिए |
समुंद्र मंथन से महालक्ष्मी जी का प्राकट्य भी आश्विन पूर्णिमा को ही हुआ था।
रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि जी का प्राकट्य दिवस भी शरद पूर्णिमा को ही है।
शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ गरुड़ पर बैठकर पृथ्वी लोक में भ्रमण करती हैं ,शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी घर घर जाकर सभी को वरदान और कृपा बरसाती हैं | कहते हैं की लक्ष्मी के आते समय रात को जो लोग सोते हुए मिलते हैं उनके घर से लक्ष्मी लौट जाती है। रात को जागने के कारण ही इस पूर्णिमा का नाम कोजागरी पूर्णिमा पड़ा, लोग शरद पूर्णिमा की रात को जागकर प्रभु का नाम जपते हैं। ( जगदीश जोशी )

Copyright © शक्ति न्यूज़ | Newsphere by AF themes.