Tue. Aug 4th, 2020

शक्ति न्यूज अल्मोड़ा |

1918 से प्रकाशित शक्ति अखबार का डिजीटल प्लेटफार्म

हाईकोर्ट में चारधाम देवस्थानम एक्ट निरस्त करने को लेकर दायर जनहित याचिका में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

1 min read

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद डा. सुब्रह्मण्यम् स्वामी की ओर से उत्तराखंड सरकार के चारधाम देवस्थानम एक्ट को निरस्त करने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट इस मामले में पिछले 29 जून से लगातार सुनवाई कर रही थी। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खण्डपीठ में मामले की सुनवाई हुई। याचिकर्ता ने राज्य सरकार के पर आरोप लगाया था कि यह एक्ट असंवैधानिक है और संविधान के अनुछेद 25,26 और 32 के विरुद्ध है । जनभावनाओं के विरुद्ध है। इस समिति में मुख्यमंत्री को भी सम्मिलित किया गया है, मुख्यमंत्री का कार्य सरकार चलाना है और वे जनप्रतिनिधि है उनको इस समिति में रखने का कोई औचित्य नहीं है। मन्दिर के प्रबंधन के लिए पहले से ही मन्दिर समिति का गठन किया हुआ । इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार ने पूछा था कि क्या यह एक्ट असंवैधानिक है जिसके जवाब में राज्य सरकार ने जवाब दिया था कि यह एक्ट बिल्कुल भी असंवैधानिक नहीं है न ही इस एक्ट से संविधान के अनुछेद 25, 26 व 32 का उल्लंघन हुआ है और न ही एक्ट जनभावनाओं के खिलाफ है। राज्य सरकार ने इस एक्ट को बड़ी
पारदर्शिता से बनाया है मन्दिर में चढ़ने वाला चढ़ावा का पूरा रिकार्ड रखा जा रहा है इसलिए यह याचिका निराधार है इसे निरस्त किया जाय। इधर मामले में हस्तक्षेप करने वाली रुलक संस्था के अधिवक्ता ने एक्ट के सम्बंध में अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट में मनुस्मृति पेश की गई जिसके अध्याय 7 में कहा गया कि राजा खुद सर्वोपरी है वह अपने दायित्व किसी को भी सौंप सकता है।संस्था द्वारा एटकिंशन का गजेटियर भी पेश किया जिसमें कहा गया कि बद्रीनाथ मन्दिर में करप्सन है इसलिए यहां एडमिनिस्ट्रेशन की जरूरत है । संस्था ने मदन मोहन मालवीय द्वारा 1933 में लोगो से की गयी अपील भी कोर्ट में पेश की। जिसके बाद सेक्युलर मैनेजमेंट और रिलिजेस एक्ट 1939 में लाया गया जिसमें सेक्युलर मैनेजमेंट आफ टेम्पिल राज्य को दिया गया था जबकि रिलिजेस मैनेजमेंट मंदिर पुरोहित को दिया गया है। संस्था ने अयोध्या मन्दिर का निर्णय भी कोर्ट में पेश किया जिनमे सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि गजेटियरों को भी साक्ष्य के रूप में माना जा सकता है। जो नया एक्ट राज्य सरकार द्वारा लाया गया है इसमें कही भी हिन्दू धर्म की भावनाएं आहत नही होती। संस्था ने जनहित याचिका को पूरी तरह निराधार व खारिज करने योग्य बताया है। इधर सुनवाई पूरी होने पर अब अदालत के फैसले का इंतजार है।

Copyright © शक्ति न्यूज़ | Newsphere by AF themes.