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दीपावली पर्व की महत्ता..

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दीपावली पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है। माना जाता है कि भगवान राम जब रावण को हराकर 14 वर्ष का वनवास पूरा कर अन योध्या लौटे थे संपूर्ण अयोध्या वासियों ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए पूरी अयोध्या को अमावस्या की काली रात को रोशनी से सजा दिया था तभी से आज तक उसी खुशी को मनाने के लिए संपूर्ण हिंदू समाज इस त्यौहार को मनाता आ रहा है। दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु ने नृसिंह का रूप धारणकर हिरण्यकश्यप का वध किया था।
दीपावली पर्व की श्रंखला में लगातार 5 पर्वों की श्रंखला है जिसमें सबसे पहले त्रयोदशी को धनतेरस का पर्व मनाया जाता है पौराणिक कथाओं के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी प्रकट हुए थे। इसलिए इस पर्व को धनतेरस कहा जाता है। धनतेरस के अवसर पर लोग घर में नया सामान खरीदना शुभ मानते हैं।
दीपावली का दूसरा दिन …..
दीपावली के दूसरे दिन चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है इस चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है। इस पर्व का भी पौराणिक महत्व यह है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध कर प्रजा को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। तब द्वारिका की प्रजा ने पूरे शहर में दीप जलाकर भगवान का धन्यवाद किया। इस पर्व को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।
दीपावली का तीसरा दिन
दीपावली पर्व की श्रंखला में कार्तिक कृष्ण अमावस्या को पूर्ण दीपावली मनाई जाती है इसके पीछे की कथा इस प्रकार है कि समुद्र मंथन से इसी दिन माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था इसीलिए इस दिन प्रत्येक भारतीय माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हैं। व्यापारी बंधु अपना बहीखाता नया बनाते हैं तथा अपने भाई खाते की पूजा अर्चना करते हैं। दूसरी महत्वपूर्ण कथा इस प्रकार है कि भगवान राम ने जब विजयादशमी को रावण पर विजय प्राप्त की तब अयोध्या वापसी की में केवल 14 दिन शेष बच गए थे। भगवान श्री राम को अयोध्या वापसी में 1 दिन की भी देरी नहीं करनी थी क्योंकि भरत ने उनसे वचन लिया था कि वनवास की अवधि पूर्ण होते ही आप अयोध्या नहीं पहुंचे तो मैं अपने प्राण त्याग दूंगा। भगवान राम ने भी वापसी में सब से मिलने का वचन दिया था, वह भी वचन निभाना था। तब भगवान श्री राम लंका से विभीषण के पुष्पक विमान में बैठकर वनवास काल के सभी भक्तों ,ऋषि-मुनियों से मिलते हुए कार्तिक अमावस्या को अयोध्या पहुंचे तथा हनुमान जी को अपने आने की सूचना देने को भरत के पास भेजा। भरत ने खुशी में संपूर्ण अयोध्या को रोशनी से सजाने का आदेश दिया। तब संपूर्ण अयोध्या को दीप मालाओं से सजाकर अमावस्या की अंधेरी रात को जगमगा दिया तभी से उसी दिन की याद में आज भी संपूर्ण भारत वासी दीपोत्सव पर्व मनाते आ रहे हैं।
भारतीय संस्कृति में दीपक को सत्य और ज्ञान का द्योतक माना जाता है क्योंकि वह स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है। दीपक को ब्रह्म स्वरूप माना जाता है।
दीपावली पर्व की संख्या में दीपावली के दूसरे दिन शुक्ल प्रतिपदा को अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है अन्नकूट/ गोवर्धन पूजा भगवान श्री कृष्ण के अवतार के बाद द्वापर युग से प्रारंभ हुई। इस दिन गोवंशीय पशुओं को स्नान करा कर धूप, चंदन ,तथा फूल माला पहनाकर उनका पूजन किया जाता है। इस दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसके समीप विराजमान श्री कृष्ण के सम्मुख गाय तथा ग्वाल वालों की रोली ,चावल, फूल, फल ,मौली ,दही तथा तेल का दीपक जला कर पूजा और परिक्रमा की जाती है। जब श्री कृष्ण ने ब्रज वासियों को मूसलाधार वर्षा से बचाने के लिए 7 दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली में उठाकर इंद्र का मान मर्दन किया तथा सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रज वासियों पर जल की एक बूंद भी नहीं पड़ी सभी गाय गोपियां उसकी छाया में सुख पूर्वक रहे .तब ब्रह्माजी से इंद्र को भगवान कृष्ण के अवतार की बात जानकर बहुत लज्जित हुए तथा अपने कृत्य पर क्षमा मांगी। भगवान कृष्ण ने सातवें दिन गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करने करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो मनुष्य दुखी रहता है वह वर्ष भर दुखी रहेगा इसलिए हर मनुष्य को इस दिन प्रसन्न रहकर भगवान श्री कृष्ण के प्रिय अन्नकूट उत्सव को आनंद पूर्वक बनाना चाहिए।
दीपावली पर्व की श्रंखला में अन्तिम दिन भैया दूज का पर्व आता है.|कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं यह पर्व भाई के प्रति बहन के स्नेह को व्यक्त करता है।
दीपावली से संबंधित कुछ अन्य तथ्य
दीपावली के दिन माता दुर्गा ने काली का रूप धारण किया था। भगवान महावीर को भी मोक्ष की प्राप्ति दीपावली के दिन ही हुई थी। दीपावली पर ही पांडव बनवास एवं अज्ञातवास पूर्ण कर वापस लौटे थे। कार्तिक अमावस्या के दिन ही सिखों के छठे गुरु हरगोविंद दास जी जहांगीर की कैद से मुक्त होकर अमृतसर वापस लौटे थे। सम्राट विक्रमादित्य का राज्याभिषेक भी दीपावली के दिन ही हुआ था इसलिए दीप जलाकर खुशियां
मनाई गई थी। अमृतसर स्वर्ण मंदिर का निर्माण भी दीपावली के दिन ही प्रारंभ हुआ था। स्वामी रामतीर्थ का जन्म एवं महाप्रयाण भी दीपावली के दिन ही हुआ था।
जगदीश जोशी….

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