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अन्तिम कड़ी में….. जानिये क्यों हुई बद्रेश्वर की रामलीला बंद—पढ़े पूरा विवरण

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उधर सर्किट हाउस में प्रात: काल से भूखे अ0जि0मजिस्ट्रेट के द्वारा थाने से बुलाये गये थे, के साथ बैठे हुए निरंतर फोन से श्री मेहता जिला मजिस्ट्रेट से आदेश प्राप्त करने का प्रयत्न कर रहे है तथा समझौते के लिए भी हल निकाल रहे थे, परंतु शाम तक वे कुछ भी आदेश प्रान्त नहीं कर पाये। इसी बीच रानीखेत से पुलिस सुप्रिन्टेन्डेंट मि0 वाइट हाउस भी वहां आये। उन्होंने अधिकारी वर्ग द्वारा 144 के प्रयोग से अपनी असहमति प्रकट थी तथा उनका कथन था कि यदि धारा 144 का प्रयोग कर बद्रेश्वर की भूमि सरकारी अधिकार कर वह पन्द्रह दिन के लिए रामलीला उत्सव करने को दी जाती तो शांति भंग का अदेशा ही न होता और न वर्तमान स्थिति उत्पन्न होती।
एक बार पुन: समझौता की चेष्टा की गई पर मुन्तजिम साहब अपनी हट पर अड़े रहे। इसी बीच सूचना मिली कि श्री मेहता बीमार होकर नैनीताल रामजे अस्पताल में भर्ती हो गये हैं। स्थानीय अधिकारियों ने पुन: फोन किया। कहा जाता है कि उन्होंने यह मामला स्थानीय अधिकारियों पर छोड़ दिया।
पांच बज चुकने पर पुन: सत्याग्रही जत्थे की तैयारी हुई 5 महिला सत्याग्रही व 5 अन्य सत्याग्रही जलूस के साथ बद्रेश्वर के लिए रवाना हुए और वहां गिरफ्तार कर लिए गए दुसरी ओर नगर मजिस्ट्रेट के निवास स्थान पर समझौते की चर्चा पुन: आरम्भ हो गई। श्री हरगोविंद पंत व पं0 देवीदत्त पंत वहां बुलाये गये। वहां मुन्तजिम श्री जगदीश चन्द्र जोशी भी उपस्थित थे। श्री पंत जी के आदेशानुसार श्री देवी दत्त पंत ने एक पत्र मुन्तजिम के नाम आज्ञा प्रान्त करने के लिए लिखा। जिसमें यह भी लिख दिया गया कि इस पत्र के लिखने से किसी भी पक्ष के काननूी अधिकारों को कोई ठेस नहीं पहुंचती। अधिकारी वर्ग व जनता के नेताओं को आशा थी कि समझौता हो जावेगा परंतु मुन्तजिम साहब ने पुन: अन्तिम बार इंकार कर दिया। इस प्रकार समझौते के सभी प्रयास विफल हो गए। इस पर श्री देवीदत्त पंत ने अपनी लिखी हुई चिठ्ठी वापस मांगी क्योंकि मुन्तजिम उस पत्र के आधार पर अपनी स्वीकृति नहीं दे रहे थे। परंतु उस अधि​कारियों द्वारा 144 धारा के हटा दिये जाने की घोषणा सुन धमका गये और वह चिठ्ठी जबरन अपने जेब में रखकर अधिकारियों को बुरा भला कहकर अपने घर को चले गये। तुरंत ही नगर मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित आज्ञा थाने में बनी सत्याग्रहियों को सुना दी गई कि नगर के सम्मानित व्यक्तियों द्वारा आश्वासन देने पर कि रामलीला और विजयादशमी का उत्सव शांति पूर्वक मनाया जायेगा और किसी प्रकार शान्ति भंग नहीं होगी।
ता0 14 को लागू की गई धारा 144 की आज्ञा वापस ले ली गई सभी बन्दी मुक्त कर दिए गए। 8 बजे एक वृहद जलूस थाने से मुक्त सत्याग्रहियों को लेकर श्री नन्दादेवी मन्दिर पहुंचा वहां श्री देवीदत्त पंत की अध्यक्षता में सभा हुई श्री हर गोविंद पंत ने अपना सारगर्भित भाषण द्वारा जनता को अपने अधिकारों की प्राप्ति पर बधाई दी। आपने सार्वजनिक अधिकारों की रक्षार्थ हुए हिन्दू मुस्लमान ईसाई एक्य की सराहना की। उपस्थित जनता को आश्वासन दिया कि वे यथा शक्ति बद्रेश्वर की भूमि को प्राप्त करने लिए प्रयत्न करें और अगले वर्ष से उस स्थान पर निर्विघ्न यह उत्सव मनाया जायेगा। श्री देवी दत्त पंत, श्री प्यारे लाल गुप्ता तथा मदन मोहन अग्रवाल ने अपने भाषणों द्वारा रामलीला कमेटी की ओर से जनता नियंत्रण व सत्याग्रह संचालन योग देने पर आभार प्रदर्शित किया और सभा विसर्जित की गई। विजयादशमी की सायंकाल श्री रामचन्द्र का जलूस लालाबाजार से निकला। इस वर्ष विजयादशमी का जलूस और वर्षों की अपेक्षा वृहद तथा उत्साहप्रद था। जलूस सारी बाजार घूमकर बद्रेश्वर में सम्पन्न हुआ सर्वत्र जलूस में हिन्दू, मुस्लिम एकता के नारे लग रहे थे। बद्रेश्वर में तीन दिनों तक लीला खलेली गई। देवीदत्त जी के नेतृत्व में प्रहसन स्वरुप में 144 की लीला खेली गई जो अत्यधिक रोचक थी। जनसुदाय ने उस की विशेष सराहना की। इसके पश्चात् रावण के पुतले बद्रेश्वर मैदान के बीच में फूंके गये। दूसरे दिन भरत मिलाप भी बद्रेश्वर के मैदन में हुआ। दोनों दिनों का कार्यक्रम बड़ा ही रोचक था जिसमें नृत्य प्रहसन व गीतों का आयोजन था अपार भीड़ थी और ठंण्ड बड़ रही थी फिर भी 11 बजे सात तक लीला होती रही।
समाप्त

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