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जी रया जागि रया आपुणि बोलि भाषा कैं झन भूलिया

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अल्मोड़ा। बालप्रहरी तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा आयोजित 82वें ऑनलाइन कार्यक्रम ‘उत्तराखंड के भाषाओं की पहेलियां कार्यशाला’ के मुख्य अतिथि शिक्षाविद् एवं साहित्यकार जगदीश जोशी ने बच्चों से कहा कि एक दौर था जब घर गांवों में दादा-दादी या नाना-नानी बच्चों से पहेलियां बूझते थे। बच्चे उनका उत्तर देते थे। उन्होंने कहा कि तकनीकी के नए दौर ने दादा-दादी व नाना-नानी के दौर को नए अंदाज में आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में कुमाऊं व गढ़वाल के अलग-अलग अंचलों के बच्चों ने एक ही पहेली को अपने-अपने अंदाज में प्रस्तुत किया। यही लोक की विशेषता है। उन्होंने कहा कि कुमाउनी, गढ़वाली, जौनसारी व रवांल्टी भाषा का अपना अलग लहजा है। उन्होंने कहा कि पहेलियों/ऑण के उत्तर जब दूसरे बच्चे नहीं देते तब ‘ऑण’ लगने यानी हार-जीत का खेल होता था। उन्होंने कहा कि पहेलियां बच्चों का मनोरंजन करने के साथ ही उनकी तर्क शक्ति को बढ़ाती हैं। उन्होंने ‘जी रया जागि रया, आपुणि बोलि भाषा कै झन भुलिया’ बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कुमाउनी में अपना भाषण प्रस्तुत किया।
आज के कार्यक्रम में हर्षिता बिष्ट, चित्रांशी लोहनी, परीषा नगवाल, लक्की नेगी, तनीषा आर्या, ऋत्विक पचौली, विहान तिवारी, ऋषि जोशी, फाल्गुनी शक्टा, देवरक्षिता नेगी, यशपालसिंह शीला, सुरेंद्रसिंह शीला, मन्नत रावत, आदित्य बोरा, आस्था बोरा, चैतन्य बिष्ट, गुंजन शर्मा, ऊर्जा जोशी, वर्णिका जोशी, श्रीमन भट्ट, सृजन भट्ट, सुवर्णा जोशी, शिवांशी जोशी,प्रखर बहुगुणा तथा कार्तिक जोशी सहित 37 बच्चों ने कुमाउनी,गढ़वाली तथा रवांल्टी भाषा में पहेलियां/ऑण प्रस्तुत किए।
अध्यक्ष मंडल में शामिल हर्षिता रौतेला, आदित्य रस्तोगी,महिमा किरौला, रचित शक्टा व स्मिता कुंवर ने आंचलिक भाषा में अपना भाषण रखते हुए पहेलियां बूझी। कार्यक्रम की विशेषता रही कि कई गैर उत्तराखंडी बच्चों ने उत्तराखंड की भाषा में अपना भाषण रखते हुए पहेलियां प्रस्तुत की। पहेली वाचन कार्यशाला का संचालन राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल चौसाला की कक्षा 7 की छात्रा पिंकी पांडे ने किया। प्रारंभ में बालप्रहरी के संपादक तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा के सचिव उदय किरौला ने कार्यक्रम का परिचय देते हुए सभी का स्वागत किया।
आकाश सारस्वत उप निदेशक शिक्षा विभाग उत्तराखंड, बालप्रहरी के संरक्षक तथा सेवानिवृत्त आयकर आयुक्त श्यामपलट पांडेय, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य कुसुम नैथानी,नम्रतासिंह, जगमोहन रौतेला, महेश जोशी, बलवंतसिंह नेगी, दलीप बोरा, कृपालसिंह शीला, गीता जोशी, गीता कन्नौजिया, शशि कंडवाल सहित कई शिक्षक, साहित्यकार तथा अभिभावकों ने ऑनलाइन बच्चों की पहेलियों को सुना। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागी बच्चों को ऑनलाइन प्रमाण पत्र दिए गए।

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