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जानिये अल्मोडा नगर में कितने भैरव

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पौष माह में प्रतिवर्ष भैरव नाथ की अपने ढंग से रोटभेंट देकर पूजा की जाती है। यहां के भैरवों की भी अपनी कहानी है वे भोलानाथ जी के अंगो के आधार पर बने हैं। पल्टन बाजार में आगे चलकर किले में गढ़ी भैरव है अर्थात् किले के भैरव के लिए आर्मी कैन्टीन के पास से रास्ता जाता है। मार्ग में हनुमान जी का मंदिर पड़ता है। उसमें एक सिर कटी मूर्ति रखी है वहां पर एक मस्जिद भी है पहले वह आम रास्ता था परंतु अब सेना ने उसे बंद कर दिया है। गढ़ी भैरव के दर्शन करने हैं तो आर्मी कैंट से जाकर करना चाहिए। वहां निसान देवी के दर्शन हो जायेंगे। दूसरे भैरव बटुक भैरव हैं कहा जाता है कि यहां भोलेनाथ जी का सिर गढ़ा है। तीसरे भैरव खजांची मुहल्ले में हैं वहां भोलेनाथ जी का धड़ माना जाता है चौथे भैरव चौघानपाटा के पास हैं। पांचवे भैरव नन्दादेवी परिसर के बाहर छोटे मन्दिर में हैं। छठा भैरव मन्दिर कूर्मांचल एकेडमी परिसर में है। सातवे भैरव खुटकुणी भैरव हैं कोई मानते है वहा भोलेनाथ जी के पैर हैं। आठवे भैरव मल्ला चौसार के आगे है।
भैरव पुजारी को नाथ व गिरी कहते है जिनका मरणो परांत दाह संस्कार न होकर समाधि दी जाती है।

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