July 7, 2022

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जानिये:— ‘लगभग एक सौ वर्ष पुरानी है पाण्डेखोला की रामलीला’

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पाण्डेखोला अल्मोड़ा नगर के एक किनारे में बसा हुआ है। यहाँ की रामलीला अल्मोड़ा नगर की रामलीला में दूसरी सबसे पुरानी रामलीला है। बद्रेश्वर मन्दिर माल रोड अल्मोड़ा के पास होने वाली रामलीला अल्मोड़ा की सबसे पुरानी रामलीला है उसके बाद यह श्रेय पाण्डेखोला की रामलीला को मिलता है। नवम्बर 1920 का यह फोटोग्राफ पाण्डेखोला की रामलीला की ऐतिहासिकता को दर्शाता है।
अल्मोड़ा नगर की बसासत पर ध्यान दें तो तत्कालीन स्थिति को समझा जा सकता है। नगर ब्राह्मण बहुल और ब्राह्मणों के मुहल्लों से घिरा हुआ था। प्रत्येक मुहल्ला भी अपने बिरादरों या अपने रिश्तेदारों से भरा हुआ था। प्रत्येक मुहल्ले के अन्दर भी घर- परिवार का सा वातावरण था। कुछ सोच समझ कर ही चन्द राजाओं ने इस नगर को बसाया था जिस कारण इस नगर को ऐतिहासिक, बौद्धिक एवं सांस्कृतिक नगर का गौरव प्राप्त हुआ। इसका प्रमाण है इस नगर में विद्यालय, डिग्री कालेज, कन्या विद्यालय, आदर्श विद्यालय, नगरपालिका जैसी संस्थाएं उत्तराखंड में लगभग सर्वप्रथम अस्तित्व में आई।रामलीला का भी प्रदर्शन सर्वप्रथम यहीं हुआ।
पाण्डेखोला के लोगों में गायन का गुण लगभग जन्मजात था।यहाँ के लोग भी बद्रेश्वर की रामलीला में पात्र के रूप में अभिनय कर अपना योगदान दिया करते थे। वान्छित तबज्जो न मिलने के कारण पाण्डेखोला के तत्कालीन लोगों ने अलग से अपने मुहल्ले में रामलीला करने की मानी और रामलीला प्रारंभ कर दी। अब अनेक वर्ष से गये हैं यहाँ रामलीला नहीं हो रही है।अब पुराना माहौल भी नहीं रहा। पुरुषों की बैठकी होली भी अब लगभग समाप्त है। अभिभावकों को अपने बच्चों के कैरियर की चिंता बच्चों के बचपन से ही होने लगी है। इस कारण से भी माहौल बदल गया है तथा अधिकांश पुराने निवासी पलायन कर गए हैं।
बीते हुए क्रिया कलाप इतिहास का अंग बन जाते हैं। इसी रूप में पाण्डेखोला की रामलीला भी याद की जाएगी।
पाण्डेखोला की रामलीला हस्तलिखित पुस्तक के आधार पर खेली जाती थी। हस्तलिखित पुस्तक के क्षीण हो जाने पर नई लिखी जाती थी।सौभाग्य है कि हस्तलिखित पुस्तक सुरक्षित है।
इस फोटोॻाफ में दिखाई दे रहे लोगों के वंशधरों के लिए भी यह फोटोग्राफ अमूल्य है। यह फोटोग्राफ श्री गिरीश चन्द्र पाण्डे ,निवासी मुहल्ला पाण्डेखोला अल्मोड़ा के सौजन्य से प्राप्त हुआ। श्री गिरीश चन्द्र पाण्डे जी का पाण्डेखोला की रामलीला में बहुत योगदान रहा है।
साभार—
प्रकाश चन्द्र पन्त
सम्पादक— ‘अल्मोड़ा टाइम्स’
पाण्डे खोला, अल्मोड़ा

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