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जानिये— जब संसद में शक्ति की चर्चा हुई

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भारतीय लोकसभा में पत्रकारों के वेतन सम्बंधी विधेयक में चर्चा करते हुए गढ़वाल के सांसद भक्तदर्शन ने 13 सितम्बर 1955 को जो भाषण दिया उसमें अल्मोड़ा से प्रकाशित होने वाले शक्ति और गढ़वाल से प्रकाशित होने वाले कर्मभूमि (अब प्रकाशन बंद हो गया है) की सराहना की गई।
संसद में भक्तदर्शन द्वारा दिया गया भाषण के कुछ अंश निम्न है:—
भारत के स्वाधीनता संग्राम में हमारे हिन्दी पत्राों और अन्य भारतीय भाषाओं ने पूरा समर्थन और सहयोग दिया है। हमारे उत्तर प्रदेश के
एक प्रसिद्ध पत्र प्रताप का नाम ही इस बात का साक्षी है कि किस प्रकार से नौकरशाही के दिल को दहलाने वाले लेख उसके अंदर निकला करते थे।
मैं आपके सामने एक उदाहरण और रखना चाहता हूं तिब्बत के सीमावर्ती भाग में कोई अंग्रेजी का पत्र नहीं जाता और जहां जो कोई आदमी अंग्रेजी नहीं जानता वही अल्मोड़ा के पत्र शक्ति और गढ़वाल के पत्र कर्मभूमि ने स्वाधीनता का बिगुल
बजाया और स्वाधीनता संदेश वहां पहुचाया।

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