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16 वीं शताब्दी में निर्मित मल्ला महल पर्यटन गतिविधि बढ़ायेगा

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-कैलाश पाण्डे

एक लंबे अंतराल के बाद अल्मोड़ा स्थित स्थानीय कलैक्ट्रेट परिसर में जाने का अवसर मिला और वहां जाने पर देखा कि वहां पर स्थित भवनों का कायाकल्प हो रहा है। जिज्ञासा वश जब इस संबंध में जानकारी हासिल करने की कोशिश की गयी तो मुझे बताया गया कि मल्ला महल और रानी महल को उसका पुराना स्वरूप दिया जायेंगा। साथ ही यहां स्थित कलैक्ट्रेट को नवनिर्मित परिसर विकास भवन के समीप स्थानांतरित किया जा रहा है तथा यहां पर योजना के अनुसार एक ओपन एयर थिरेटर के साथ ही ध्वनि एवं प्रसारण की व्यवस्था की जायेंगी। इसके साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए और भी कई उपाय किये जा रहे है। जिनमें रानी महल और मल्ला महल में संग्राहलय के साथ ही एक गैलरी का निर्माण किया जा रहा है जिस गैलरी में यहां के संस्कृति के साथ ही यहां के राजनीतिक परिदृश्य का अवलोकन किया जा सकेंगा। इसके साथ ही इस परिसर में एक दो मंजिला आधुनिक टॉयलेट का निर्माण किया जायेगा उसकी छत को ब्यू पांइट बनाया जायेगा जिससे की पर्यटक नगर के चारों ओर फैली पहाड़ियों के दर्शन कर सकेंगे। यह कार्य प्रथम फेज में किया जा रहा है। परिसर में ही स्थित 1588 में निर्मित रामशिला मंदिर को उसका पुराना स्वरूप दिया गया है। जिसमें मंदिर परिसर में स्थित पीपल के विशालकाय वृक्षों की लोपिंग के साथ ही उसकी जड़ों को फैलने से रोकने के उपाय भी किये गये है।


इस ऐतिहासिक मल्ला महल और रानी महल को एक संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना तो वर्ष 2015 में बन गयी थी इसके लिए शासन को स्वीकृति के लिए करीब 29.9 करोड़ की योजना भेजी गयी थी। साथ ही वर्तमान कलैक्ट्रेट परिसर को विकास भवन के पास ही स्थानांतरित करने की योजना बनायी गयी थी और इसके लिए प्रथम चरण में ही 12 करोड़ रूपये भी स्वीकृत कर इसका निर्माण प्रारंभ कर इसे 31 मार्च 2019 तक बनकर तैयार हो जाना था और कलैक्ट्रेट परिसर को नवनिर्मित परिसर में स्थानांतरित हो जाना था।
यदि हम मल्ला महल के इतिहास की ओर देखें तो यह लकड़ी और पत्थरों से बना है इससे पता चलता है यह कस्बा स्थापना से पूर्व कत्यूरी राजा बैंचल देव के अधीन था तथा 16वीं शताब्दी में चंद्र राजाओं ने इस शहर पर अपना कब्जा जमाया। तब तत्कालीन राजा रूद्र चंद्र ने अल्मोड़ा के मध्य में मल्ला महल की स्थापना की थी ऐसी मान्यता है कि अल्मोड़ा नगर में भगवती नंदा के सम्मान में धार्मिक नंदा देवी मेले का तभी से शुभारंभ हुवा और चंदों का नंदा से संबंध राजा बाज बहादुर चंद्र के शासनकाल से 1638-78 जुड़ने का साक्ष्य इतिहास में प्राप्त होता है। तत्कालीन
ऐतिहासिक घटनाओं का अध्ययन करके इसके इतिहास को समझा जा सकता है। राजा बाजबहादुर चंद्र के शासनकाल से ही अल्मोड़ा नगर में भगवती नंदा के सम्मान में धार्मिक नंदा देवी मेले का शुभारंभ हुवा और तब यह कलैक्ट्रेट स्थित परिसर में ही आयोजित होता था। उसके बाद 19वीं सदी में यहां अंग्रेजों ने अल्मोड़ा में कब्जा किया और 1815 में पहले जिलाधिकारी के तौर पर ई डब्लू गार्डनर ने यहां पहली कुर्सी संभाली थी और 1815 के बाद ही मल्ला महल से भगवती नंदा देवी को जिसे कि कुमांउ के चंदवश द्वारा प्रतिवर्ष पूजा जाता है उसे नंदा देवी परिसर में स्थानांतरित किया। तब से प्रतिवर्ष भाद्र मास की अष्टमी को चंद वंशों के वंशज यहां आकर मां भगवती नंदा की पूजा अर्चना तांत्रिक विधि से करते आ रहे हैं। तब लोकरत्न पंत गुमानी ने लिखा था—
विष्णु देवाल उखाड़ा उपर बंगला बना खड़ा
महाराज का महल ढ़हाया, बेड़ी खाना वहां धरा
मल्ला महल उड़ाई नंदा बंगलों से वह भरा
अंग्रेजों ने अल्मोड़ा का नक्शा ओरी और करा

विगत वर्ष अगस्त माह में तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी ने अल्मोड़ा स्थित कलैक्ट्रेट को संग्रहालय के रूप में विकसित करने और वहां स्थित राजा रूद्र चंद द्वारा निर्मित मल्ला महल और रानी महल को पुराने स्वरूप देेने के लिए एक कार्याशाला का आयोजन किया गया और लोगों से इसके लिए सुझाव मांगे गये तथा उनके द्वारा सुझावों पर कार्य करने की योजना तैयार की। इस योजना के अंतर्गत उत्तराखंड के पर्यटन सचिव ने यह निर्देश दिये कि मल्ला महल व रानी महल सहित पूरा कलैक्ट्रेट को विरासत के रूप में विकसित करने के लिए फोर्ट ट्रस्ट गठित किया जाय। यह ट्रस्ट उक्त स्थलों के रखरखाव व अन्य कार्यो की देखरेख में पूर्ण भागीदारी करेंगा। इस परिसर को उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने विरासत के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है ताकि इसे पुनः किले का स्वरूप दिया जा सकें। पर्यटन विकास परिषद का यह भी प्रयास है कि मल्ला महल व रानी महल में बनने वाले संग्राहलय को विश्व स्तरीय संग्राहलय बनाया जाय तथा यह विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाकर और भारत के पर्यटन मानचित्र में मल्ला महल की अपनी पहचान बनी रहे।
इसके पश्चात मल्ला महल को पुराने किले के रूप में परिवर्तित करने का कार्य पर्यटन विकास परिषद द्वारा विगत अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में प्रारंभ कर दिया गया और इसके प्रारंभ होने के बाद से ही स्थानीय कलैक्ट्रेट को नये कलैक्ट्रेट भवन में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गयी।
रानी महल और मल्ला महल को पुराने स्वरूप में लाकर जहां इसे संग्रहायल में तबदील किया जायेगा और मल्ला महल रानी महल में अलग अलग दो संग्रहालय स्थापित किये जायेंगे। इस कार्य के लिए एशियन डेवलेभमेंट बैंक (ADB) द्वारा इसे वित्त पोषित किया जा रहा है तथा इस कार्य के लिए उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने एक आर्किटेंक्ट के साथ ही इंजीनियरों की एक टीम भी गठित की है और इस कार्य के लिए समय समय पर क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा0 चंद्र सिंह चौहान जो कि एक जाने माने पुरातत्वविद् से परार्मश भी लिया जा रहा है तथा उनके परार्मश के अनुसार ही यह कार्य संपादित किया जा रहा है।

इस कार्य के पूर्ण हो जाने पर जहां अल्मोड़ा में देशी विदेशी पर्यटकों की आवाजाही में वृद्धि होने के साथ ही यहां का पर्यटन व्यवसाय बढ़ेगा तथा यहां स्थित होटल व रिर्जोटों की आर्थिकी में वृद्धि होगी। वहीं इस क्षेत्र का विकास भी होगा। यह तभी संभव है जब अगाध गति से यह निर्माण कार्य चलता रहें और इसमें किसी प्रकार की बाधा न उत्पन्न हो।
इस बीच होटल ऐसोशियन अल्मोड़ा द्वारा मल्ला महल में हो रहे निर्माण कार्यो की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुवे कहा है कि मल्ला महल के पुराने स्वरूप को देखने के लिए यहां पर्यटक तो आयेंगा ही और जो स्वरूप बनने के बाद कलैक्ट्रेट परिसर लेगा उसे देखने के लिए पर्यटक कम से कम एक दिन रूककर इसका आनन्द लेगा तथा ब्यू पांइट पर बैठकर यहां की संस्कृति को अंगीकृत करेंगा। इस कार्य के लिए होटल ऐसोशियन ने जिला अधिकारी नितिन सिंह भदौरिया की प्रसंशा करते हुवे कहा है कि
उनकी सोच इस जनपद में पर्यटक को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र का विकास करना ही प्रमुख है।

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