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5 सितम्बर शहीद दिवस पर विशेष वतन पर मिटने वाले शहीद

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1857 में जब पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम प्रारम्भ हुआ तो इसकी प्रतिध्वनियां कुमाऊं में देर से सुनाई दी। पूरे देश में लंबे समय तक हुई खूनी क्रान्ति का असर काली कुमाऊं (चम्पावत जनपद) के तीन देश भक्तों पर पड़ा।
कालू माहरा के नेतृत्व में एक सेना बनाई गई जिसने अंग्रेजों का सामना किया। (कुछ इतिहासकारों का मानना है कि उन्हें कुछ नवाबों ने अंग्रेजों से लड़ने के लिये दी) कुछ का मानना है कि कालू माहरा के नेतृत्व में अंग्रेजों से कुछ स्थानों पर जबरदस्त लड़ाई हुई इस सम्बंध में अधिक शोध नहीं होने के कारण प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के कुमाऊं के वीरों की साहस गाथा ज्यादा प्रकाश में नहीं आ सकी। इस दौर में आनन्द सिंह फर्त्याल और बिशन सिंह करायत को अंग्रेजों ने गोली मार दी। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में शहीद होने वाले इन दो देश भक्तों के अलावा तीसरे नेता कालू माहरा को अंग्रेजों ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई तराई के कुछ हिस्सों में इसका असर पड़ा कुछ स्थानों में तो अंग्रेजों को खदेड़ दिया गया। लेकिन अन्तोगत्वा अंग्रेज फिर काबिज हो गये प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद कुमाऊं में 1921 में मकर संक्राति के पवन पर्व पर बागेश्वर में कुली बेगार के रजिस्टरों को बहा कर ब्रिटिश हुकुमत को सबसे बड़ी चुनौ​ती दी। महात्मा गांधी ने इसे रक्त हीन क्रान्ति की संज्ञा दी। कुमाऊं में स्वतंत्रता संग्राम में अलग—अलग समय में लोगों ने हिस्सेदारी की। 1921, 1930, 1941 और फिर 1942 में तो मातृ अल्मोड़ा जनपद (बागेश्वर, चम्पावत, पिथौरागढ़ सहित) में जो गिरफ्तारी हुई यह पूरे भारत में एक रिकार्ड है। अल्मोड़ा जनपद में सन् 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में शहीदों की कुर्बानी भुलाई नहीं जा सकती। शहीदों ने गोलियां छाती पर खाई और अंग्रेजों का डट कर मुकाबला किया सल्ट जिसे दूसरी बार देाली भी कहा जाता है। वहां सन् 1942 के 5 सितम्बर को भारत छोड़ो आन्दोलन में सल्ट के खुमाड़ क्षेत्र में शहीद हुए वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की याद में प्रतिवर्ष शहीदों के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की जाती है। आज के दिन सल्ट के खीमानन्द पुत्र ​टीका राम ग्राम खुमाड़, गंगा दत्त पुत्र टीका राम ग्राम खुमाड़, बहादुर सिंह पुत्र पदम सिंह ग्राम खुमाड़, चूड़ामणि पुत्र परम देव ग्राम खुमाड़, बद्रीदत्त पुत्र शंकर दत्त ग्राम ​पीपना, इन वीर सेनानियों को शत् शत् नमन इसके साथ ही वतन पर मर मिटने वाले जनपद अल्मोड़ा के नाम इस प्रकार है
देघाट— हरी कृष्ण पुत्र दुर्गा दत्त ग्राम गेलीपार, हीरामणि पुत्र त्रिलोचन ग्राम खल्डुवा।
चनौदा— शिन सिंह बोरा पुत्र दान सिंह ग्राम गुरुड़ा, रतन सिंह कपडोला पुत्र दौलत सिंह ग्राम अंगरे—पच्चीसी, त्रिलोक सिंह पांगती पुत्र भवान सिंह ग्राम मुनस्यारी, जौहार।
इसके अलावा श्री गांधी आश्रम चनौदा द्वारा प्रेरणा प्राप्त् कर राष्ट्र सेवक पचासों की संख्या में रहे। निम्न देश भक्त जेलों में रह कर शहीद हुए उदय सिंह बोरा पुत्र भवान सिंह ग्राम गुरुड़ा, बिशन सिंह बोरा पुत्र दान सिंह बोरा ग्राम गुरुड़ा, दिवान सिंह भाकुनी पुत्र गुलाब सिंह ग्राम शैल, बाग सिंह दोसाद पुत्र खीम सिंह ग्राम छानी, अमर सिंह पुत्र देव सिंह ग्राम दिगरा।
सालम— नर सिंह धानक पुत्र भ्योराज सिंह ग्राम चौकुना, टीका सिंह कन्याल पुत्र जीत सिंह ग्राम काण्डे
प्रस्तुति:— कैलाश पाण्डे

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