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“उत्तराखंड में उच्च शिक्षा कल, आज और कल” विषय पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तराखंड द्वारा प्रादेशिक विचार गोष्ठी का आयोजन

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अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, नई दिल्ली के सहयोग व तत्वाधान में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तराखंड द्वारा “उत्तराखंड में उच्च शिक्षा कल, आज और कल” विषय पर एक प्रदेश स्तरीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसको अंतर्गत 4 उप विषयों 1. उच्च शिक्षा में स्वायत्तता की रक्षा, 2. उच्च शिक्षा में सुधार व परिवर्तनों की आवश्यकता, 3. उच्च शिक्षा में नैतिक व शाश्वत मूल्यों की रक्षा, 4. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उत्तराखंड में लागू करने के लिए आवश्यक उपाय व सुझाव का चयन कर विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित किए गए। प्रादेशिक विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि प्रोफेसर एम.एस.एम. रावत, पूर्व कुलपति हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय तथा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग के सलाहकार ने अपने संबोधन में कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सही संदर्भ में उत्तराखंड में लागू किया जाने की शुरुआत की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि भूतकाल व वर्तमान में विचार अंतर हो सकता है किंतु भविष्य जो पूरी तरह हमारे नियंत्रण में है, में बेहतर कार्य करने व परिणाम प्राप्त करने का विकल्प, हमें उपलब्ध है। प्रोफेसर एम.एस.एम. रावत ने कहा कि उत्तराखंड में उच्च शिक्षा परिषद के गठन पर कार्य जारी हैl वह प्रदेश में ग्रॉस एनरोलमेंट रेशो 26% से 50% तक बढ़ाने के टारगेट के अनुसार कार्य योजना पर कार्य चल रहा है, तथा जल्दी ही रोजगार प्राप्त करने व रोजगार देने में सक्षम युवाओं को देखने के अवसर प्रदेश के विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों से प्राप्त होंगे।
प्रादेशिक गोष्ठी के दूसरे प्रमुख वक्ता दून विश्वविद्यालय, देहरादून के प्रबंधन विभाग के प्रमुख व डीन प्रोफेसर एच.सी. पुरोहित ने अपने विचार रखते हुए आजादी से आज तक उच्च शिक्षा विभाग में कुछ सुधारों के लिए बने शिक्षा आयोगों द्वारा किए गए कार्यों व उनके लाभों के बारे में अवगत कराया। प्रोफेसर पुरोहित ने कहा कि वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 नई जरूरतों व छात्रों के सभी हितों की पूर्ति करने में सहायक होगी।
सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के विधि विभाग के विभागाध्यक्ष व डीन प्रोफेसर एस. डी. शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति के लागू करने में छात्रों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ही नैतिक शिक्षा पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि उदारता के साथ सख्ती दिखानी होगी ताकि शिक्षा बेहतर तरीके से रोजगार परक हो सके।
डी.ए.वी. महाविद्यालय, देहरादून के अंग्रेजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एच. एस. रंधावा ने प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के अनुरूप ग्रॉस एनरोलमेंट रेशो को बढ़ाने के लिए समय के उपरांत कार्य योजना बनाने पर जोर दिया उन्होंने विषय विज्ञान, आर्ट व कॉमर्स विषय के भविष्य में एक साथ बढ़ाए जाने की जरूरत को दृष्टिगत रखते हुए उपलब्ध सिलेबस को संशोधित व परिवर्तन करने की जरूरत बताई तथा सभी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को साथ लेकर चलने की जरूरत बताई।
उक्त प्रादेशिक विचार गोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष डॉ विजय पांडे, सोहन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा ने दिया। उन्होंने बताया कि हिमालयन राज्य उत्तराखंड में नई शिक्षा नीति लागू होने से छात्रों और छात्राओं की शिक्षा विकट पहाड़ी परिस्थितियों में आसान हो सकेगी व वह लोग बेहतर शिक्षा के साथ रोजगार प्राप्त करने में सक्षम हो सकेंगे। इस गोष्ठी में गढ़वाल व कुमाऊं मंडल से विभिन्न शिक्षकों ने सक्रिय प्रतिभा किया तथा सुधारों को शीघ्र लागू करने के लिए अपने सुझाव दिए इस गोष्ठी में डॉ उषा पाठक डॉ नवीन शर्मा डॉक्टर उमेश गैरोला डॉ शोभा डॉक्टर जगदीश पांडे डॉक्टर हेमलता भट्ट आदि उपस्थित थे।

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