June 18, 2021

शक्ति न्यूज अल्मोड़ा |

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अल्मोड़ा पुलिस का सराहनीय प्रयास – मिशन हौसला के अन्तर्गत पुलिस विभाग द्वारा रक्तदान

क्षेत्र की पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु अनुसंधान कार्यों को क्रिन्यावित करने की आवश्यकता

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आज वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार की अपर सचिव एवं (स्टैग) प्रमुख बी0 वी0 उमादेवी ने वैज्ञानिक सलाहकार समूह (स्टैग) की बैठक में कहा कि हिमालयी राज्यों में राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन के तहत वृहद और व्यापकता के साथ शोध और अनुसंधान के कार्य उल्लेखनीय है, यह शोध परिणाम इस क्षेत्र की समस्याओं के समाधान हेतु क्रियांन्वित करने की जरूरत है। इस बार यह बैठक मंत्रालय द्वारा गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय पर्यावरण संस्थान में आयोजित की गई। इस अवसर पर संस्थान के निदेषक डाॅ आर एस रावल ने इससे जुड़े देश के जाने माने वैज्ञानिकों और विभिन्न राज्यों के सचिव व विषेशज्ञों का स्वागत करते हुवे कहा कि वह स्वयं अनेक राज्यों में जाकर परियोजना कार्यों व शोध अनुसंधानों का अनुश्रवण कर रहे हैं तथा उन्होंने कहा कि मिशन के तहत अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनी कार्य हुए है।
इस अवसर पर मिशन के नोडल अधिकारी इं0 किरीट कुमार ने वर्ष 2016 से अब तक संचालित शोध परियोजनाओं की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि विभिन्न हिमालयी राज्यों में जल संरक्षण, जैव विविधिता संरक्षण, आजीविका विकल्प, दक्षता और कौशल विकास, हानिप्रद पदार्थों के निपटान, ढांचगत विकास आदि क्षेत्रों में 170 से अधिक परियोजनाएं संचालित हो रही है। उन्होने कहा कि तीन वर्ष पूर्ण कर चुकी शोध परियोजनाों में अनेक के उल्लेखनी परिणाम आए है तथा देश के विभिन्न हिमालयी राज्यों में 3 हजार से अधिक जलस्रोतों के जमीनी अध्ययन व जलस्रोतों के पुनर्रूद्धार हेतु 120 प्रारूपों को बनाने के साथ 11 हजार से अधिक वनस्पतियों और 30 हजार से अधिक जीव जंतुओं के डेटाबेस को मिशन के माध्यम से तेैयार किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में नितांत आवश्यक मानचित्रों के साथ संकटग्रस्त 51 प्रजातियों पर भी अध्ययन कार्य किया गया है। दीर्घकालिक निगरानी केंद्रों की स्थापना में भी बड़ी सफलता मिली है और 450 से अधिक निगरानी क्षेत्र अब तक स्थापित किए जा चुके हैं तथा चीड़ वनों के उत्पादों के साथ प्लास्टिक के प्रबंधन के साथ उच्च हिमालयी क्षेत्रों हेतु टिकाऊ सड़कों के निर्माण, 60 से अधिक लघु उद्यमों के प्रारूप, विभिन्न जलशोधक प्रणालियों, सतत आवास के प्रारूप, आदि को तैयार करने में विभिन्न राज्यों में उल्लेखीय कार्य हुए है। उन्होंने बताया कि अब तक हिमालयी राज्यों में सैकड़ों शोध पत्रों व पुस्तकों आदि के प्रकाशन के साथ 13 पेटेंटों को प्राप्त करने की सफलता भी मिली है।
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में संचालित परियोजनाओं की उपलब्धियों को राज्य सरकारों व अन्य संस्थानों के माध्यम से अनुप्रयोग में लाने की वकालत ​करते हुवे विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार से प्रमुख सचिव कार्यालय ने भी इस बैठक में अपने सुझाव दिए और उल्लेखनीय शोध परिणामों व माॅडलों के प्रति रूचि प्रकट की। पर्यावरण मंत्रालय से वरिष्ठ सलाहकार ललित कपूर, डीएसटी से डाॅ निषा मेंदीरत्ता, संयुक्त सचिव वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय जिग्मित तकपा, उत्तरपूर्व क्षेत्रीय विकास मंत्रालय के निदेषक डाॅ हावकिप, माउंटेन डिविजन के अपर निदेषक डाॅ शरद सापरा, पंजाब केंद्रीय विष्वविद्यालय के कुलपति डाॅ आर0 के कोहली, गुवाहाटी के राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान के प्रो0 आर 0 एम पंत, दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ डी0 सी 0 उप्रेती, दिल्ली तकनीकी विष्वविद्यालय के प्रो0 वी0 के0 मिनोल्चा, इंद्रप्रस्थ विष्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर प्रो0 जे 0 के0 गर्ग, डब्लू डब्लू एफ नई दिल्ली से दिवाकर शर्मा सहित अनेक विषय विषेषज्ञों ने इस वेबीनार में प्रतिभाग किया। संस्थान से इं0 आशुतोष तिवारी, पुनीत सिराड़ी, ई0 सैयद रहुल्ला अली, दुरपा कश्यप, जगदीश चंद्र, आशीष जोशी आदि ने वेबीनार में प्रतिभाग किया।

अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर आर जी नौटियाल का संदेश

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