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‘छोटी सरकार’ को नहीं एक भी अधिकार, उत्तराखण्ड पंचायत चुनाव

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पंचायतों को सशक्त करने के बड़े-बड़े दावों के बीच प्रदेश में संविधान के जरिए सौंपे गए अधिकारों में से एक भी अधिकार पंचायतों को नहीं सौंपा गया। ये ही वे अधिकार हैं, जिनकी बदौलत स्थानीय स्तर पर पंचायतें शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक पर निगाह रखतीं और स्थानीय जरूरतों के हिसाब से उपयोग कर पातीं।
वर्तमान में पंचायतों को कई अधिकार हैं, लेकिन शिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य आदि मूलभूत जरूरतों के लिए उन्हें सरकार की ओर देखना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय पर शिक्षा विभाग का अधिकार है। पेयजल की व्यवस्था पेयजल विभाग करता है और स्वास्थ्य विभाग के अधीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। स्कूल में शिक्षक न हों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक न हों तो ग्राम पंचायत ऐसी स्थिति में सिर्फ शिकायत ही कर सकती है। पंचायतों पर सरकारी विभागों के अधिकार को तोड़ने के लिए ही 73वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतों को 29 विषय सौंपे गए थे।

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