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बालप्रहरी के 79 वां वेबिनार में ‘लेखक से मिलिए’ शीर्षक पर आनलाइन कार्यक्रम

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अल्मोड़ा। बालप्रहरी तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा आयोजित 79वें ऑनलाइन कार्यक्रम ‘लेखक से मिलिए’ में विज्ञान लेखक तथा कहानी के माध्यम से बच्चों के मन में वैज्ञानिक सोच जाग्रत करने के लिए प्रयासरत बच्चों के प्रिय लेखक देवेंद्र मेवाड़ी ने कहा कि विज्ञान को कठिन समझकर बच्चे विज्ञान से दूरी बनाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान की पृष्ठभूमि में इतिहास, भूगोल, राजनीति तथा साहित्य आदि सभी विषय समाहित हैं। बच्चों को कहानी सुनाते हुए उन्होंने बच्चों से कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है। हम सुबह उठने से लेकर रात सोने तक अपनी दिनचर्या में जो भी गतिविधियां करते हैं। उनमें विज्ञान निहित है। उन्होंने कहा कि हम अपने घर तथा किचन में आए दिन विज्ञान के कई प्रयोग करते हैं। अपने अनुभव के आधार पर कई नए शोध भी घर के किचन में करते हैं। परंतु हम विज्ञान को केवल बड़ी-बड़ी प्रयोगशाला का विषय मानकर उसे कठिन समझते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम रूचि लेंगे तो हमें लगेगा कि विज्ञान सबसे सरल विषय है।
अपनी कहानी के माध्यम से उन्होंने बच्चों को विज्ञान तथा पर्यावरण को सरल शब्दों में बताया। कहानी के माध्यम से ही उन्होंने बच्चों से कहा कि पेड़ हमारे जीवन के आधार हैं। पेड़ों के कटने से जहां पर्यावरण प्रभावित होता है। वहीं पशु पक्षियों का बसेरा नष्ट हो जाता है। अपनी कहानी में यथार्थ के साथ ही उन्होंने बच्चों को भूतकाल की जानकारी दी। पशु पक्षियों तथा कई वनस्पतियों के विलुप्त हाने पर उन्होंने कहा कि यदि मानव जागरूक नहीं हुआ तो भविष्य में पशु-पक्षी व पेड़ केवल रोबोट की तरह ही हमारे जीवन में अपनी भूमिका निभाएंगे।
कई बच्चों ने अपने सवाल भी रखे। केंद्रीय विद्यालय पौड़ी के श्रीमन भट्ट, बाल विकास विद्या मंदिर चौखुटिया की देवरक्षिता नेगी, राजकीय जूनियर हाईस्कूल हरमनी,चमोली की स्मिता कुंवर, यूनिवर्सल कांवेंट स्कूल हल्द्वानी के लक्ष्य उन्मुख कांडपाल, केंद्रीय विद्यालय नौएडा की वर्णिका जोशी, गुरूकुलम एकैडमी चंपावत की आद्या त्रिपाठी, आर्मी पब्लिक स्कूल के चैतन्य बिष्ट, प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल आगरा की अर्जरागिनी सारस्वत आदि बच्चों ने क्या धरती के बाहर भी जीवन है?’, गैस की लौ की तुलना में मोमबत्ती की लौ से रोशनी अधिक क्यों होती है?, हमें सपने क्यों आते हैं?, फूलों का रंग अलग-अलग क्यों होता है?, जाड़ों में हमारा चेहरा लाल क्यों हो जाता है?, कुछ लोग रात को सपने में भी क्यों बोलते हैं?, बच्चे बोलने में क्यों हकलाते हैं?, पेड़ पौधों के अतिरिक्त हमें ऑक्सीजन और कहां से मिलती है? बढ़ती उम्र के बाद बाल सफेद क्यों हो जाते हैं? जैसे सवाल पूछे। मेवाड़ी जी ने सरल भाषा में उनका जबाब दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के सभी प्रश्नों का उत्तर उनके प्रश्न के साथ बालप्रहरी में लिखित रूप में भी प्रकाशित किए जाएंगे। उन्होंने अपनी कहानी के बीच-बीच में भी ऐसे प्रसंगों व सवालों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।
प्रारंभ में श्री आकाश सारस्वत उप निदेशक शिक्षा विभाग उत्तराखंड,देहरादनू ने मेवाड़ी का स्वागत करते हुए कहा कि बच्चे क्या, क्यों तथा कैसे जैसे सवाल करना सीखें। इसके लिए बच्चों के मन से झिझक दूर किए जाने की आवश्यकता है।
इस कार्यक्रम में लगभग 2 दर्जन बच्चों के साथ ही डायट बागेश्वर के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र धपोला, राजकीय पालीटेक्निक शक्तिफार्म के प्रधानाचार्य डॉ. ओंकारनाथ कोष्ठा, डायट खंडवा, म.प्र. के अशोक कुमार नेगी, डायट अल्मोड़ा के गोपालसिंह गैड़ा, एम बी पी जी कालेज हल्द्वानी के संतोष मिश्र, महेश रौतेला(अहमदाबाद), राजा भइया गुप्ता(लखनऊ), सुनीता गुप्ता (गुड़गांव), मनोहर चमोली(पौड़ी),कुसुम नैथानी(देहरादून), राजपालसिंह गुलिया(झज्जर, हरियाणा), प्रमोद दीक्षित (बांदा), उद्धव भयवाल(औरंगाबाद), नम्रता सिंह(राजनांदगांव,छत्तीसगढ़), इंद्रा तिवारी, आभा भैंसोड़ा, मोहम्मद उमर, गीता कन्नौजिया, प्रदीपकुमार जोशी, शशि ओझा, रावेंद्रकुमार ‘रवि’, डॉ. आलोककुमार तिवारी दिनेश रावत, दिलीप बोरा, विमला जोशी, गंगासिंह रावत, एस.डी तैनगुरिया, शांतिलाल शर्मा आदि ने ऑनलाइन भागीदारी की। प्रारंभ में बालप्रहरी के संपादक तथा बालसाहित्य संस्थान के सचिव उदय किरौला ने मेवाड़ी का परिचय कराते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने ऑनलाइन कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए बच्चों, शिक्षकों तथा अभिभावकों का आभार व्यक्त किया।

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