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देश की विविध संस्कृति व बोलियां ही हमारी अपनी पहचान— सारस्वत

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अल्मोड़ा— बालप्रहरी तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा आयोजित 73वें ऑनलाइन कार्यक्रम आंचलिक लोक गीत गायन कार्यशाला के मुख्य अतिथि आकाश सारस्वत उप शिक्षा निदेशक उत्तराखंड ने कहा कि हमारे देश की विविध संस्कृति व बोलियां ही हमारी अपनी पहचान हैं। सारस्वत ने कहा कि हमारे देश की विविध संस्कृति व बोलियां ही हमारी अपनी पहचान हैं। उन्होंने कहा कि भौतिकवादी चकाचौंध में स्थानीय बोलियां ही नहीं राष्ट्रभाषा हिंदी बोलने में तक हम शर्म महसूस करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि रोजगारपरक भाषा के रूप में हम अंगरेजी तथा दूसरी विदेशी भाषाएं सीखें परंतु हमें अपनी दूधबोली आंचलिक भाषा को नहीं भुलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भी मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा देने की बात कही गई हैं। उन्होंने बालप्रहरी द्वारा ऑनलाईन कार्यक्रम मेंं संचालक,अध्यक्ष ,गीतकार,चित्रकार, कवि व वक्ता के तौर पर बच्चों की प्रतिभा की तारीफ करते हुए कहा कि प्रतिभाएं किसी क्षेत्र व समुदाय के आधार पर आगे नहीं बढ़ती। उन्हें अवसर दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने बच्चों से कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए कोई शॉटकट काम नहीं करता। सफलता के लिए हमें खूब पढ़कर अपने को सशक्त बनाना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा वह शस्त्र है जो किसी भी व्यक्ति, समाज व देश की दशा व दिशा को बदल सकता है।
सेवानिवृत्त आयकर आयुक्त श्यामपलट पांडेय ने कहा कि आंचलिक लोकगीत गायन कार्यशाला में राजस्थानी, पंजाबी, हरियाणवी, डोगरी, गुजराती, मेवाड़ी, कुमाउनी, गढ़वाली, जौनसारी लोकगीतों को जम्मू, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा,उत्तराखंड के 28 बच्चों ने प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात पर प्रशान्नता व्यक्त की कि बच्चे अपनी भाषा के गीतों के साथ दूसरी भाषा के लोकगीतों को प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बालप्रहरी द्वारा आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रमों से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर तो मिल ही रहा है। उन्हें अपनी अभिव्यक्ति का अवसर देने तथा उनके अंदर आत्मविश्वास जाग्रत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। उन्होंने इसके लिए बच्चों के अभिभावकों का भी आभार व्यक्त किया।
गीत गायन कार्यशाला के अध्यक्ष मंडल में शामिल ऊर्जा जोशी (खीरी,उ.प्र.),अभिषी गुप्ता (जम्मू), भूमिका मेनारिया(राजस्थान),ज्योति पांडे (चौसाला), लक्ष्य उन्मुख कांडपाल(हल्द्वानी), अदिति चोखड़ा(अहमदाबाद) ने अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ ही अपने लोकगीत प्रस्तुत किए। गौरव पांडे(चौसाला), चित्रांशी लोहनी, प्रांजलि लोहनी (चंपावत), कार्तिक अग्रवाल, कार्तिक जोशी, दीपांशु गहतोड़ी, उर्वशी सिंह(खटीमा), गौतम मिश्रा, अमृत पंत(हल्द्वानी),अवंतिका ओझा,वेदमित ओझा(भीलवाड़ा),ऋषि जोशी,ऊर्जा जोशी (सिंगाही,खीरी), शिवांशी जोशी, सुवर्णा जोशी(सेलाबगड़), चैतन्य बिष्ट(अल्मोड़ा),प्रकाश पुरोहित, प्रेरणा पुरोहित(चमोली), गौरव पांडे(चौसाला) आदि ने अपने-अपने लोकगीत प्रस्तुत किए। कक्षा 5 के छात्र ऋषि जोशी ने स्वयं हारमोनियम बजाकर अपना लोकगीत प्रस्तुत किया। समूचे कार्यक्रम का संचालन राजकीय कन्या इंटर कालेज उभ्याड़ी की कक्षा 9 की छात्रा नेहा आर्या ने किया।
इस अवसर पर साहित्यकार डॉ. विमला भंडारी (सलूंबर), डॉ. चेतना उपाध्याय(अजमेर), डॉ. कुसुम नैथानी(देहरादून), सुधा भागर्व(बैंगलौर), गंगासिंह रावत(हल्द्वानी), शशि ओझा (भीलवाड़ा), गीता कन्नौजिया(मल्ली मिरई) महेश जोशी(गरूड़), प्रेमप्रकाश पुरोहित (नंदप्रयाग), आभा जोशी(चंपावत), करूणा पांडे(लखनऊ), शिवदत्त तैनगुरिया(भरतपुर), महेश रौतेला(अहमदाबाद) बलदाउ राम साहू(छत्तीसगढ़), पुरूषोत्तम तिवारी(भोपाल), कमला मेनन(दिल्ली), अर्चित गुप्ता(प्रयागराज), डॉ. रितू महाजन आदि ने ऑनलाइन बच्चों की प्रस्तुति को सुना। प्रारंभ में बालप्रहरी के संपादक तथा बालसाहित्य संस्थान के सचिव उदय किरौला ने सभी का स्वागत किया। इससे पूर्व पहेली वाचन कार्यशाला में जे.पी.तिवारी(कंटरमैन) राजकीय इंटर कालेज बटुलिया,त्वरित भाषण में महेंद्र ध्यानी राजकीय इंटर कालेज धूमाकोट, देश प्रेम गीत गायन कार्यशाला में ओम बधाणी, उत्तरकाशी ने बतौर मुख्य अतिथि बच्चों से संवाद किया।

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