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व्यक्तित्व विद्याभूषण पण्डित श्री कृष्ण जोशी

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कुमाऊं ने कई विभूतियों को जन्म दिया है। इसमें तपस्विनी सरितायें पवित्र देवस्थल के साथ ही साहित्यिक, वैज्ञानिक, समाज सुधारक एवम् दानवीर और क्रान्तिकारी स्वाधीनता सेनानी है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में यहां का मनुष्य राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाता ही रहा है। यह है कुमाऊं की संस्कृति—निष्ठता एवम् राष्ट्रीयता का एक संकेत— यहां के प्रत्येक परिवार और व्यक्ति की एक कथा है इन्हीं में एक व्यक्तित्व विद्याभूषण पण्डित श्री कृष्ण जोशी का है।
अल्मोड़ा चीनाखान निवासी पण्डित बद्रीदत्त जोशी के पुत्र श्री कृष्ण जोशी का जन्म 1882 में एक ऐसे परिवार में हुआ। जिसमें अनेक कवि एवम् विद्वान रहे हैं— श्री कृष्ण जोशी की छवि एक महान कवि प्रसिद्ध ज्योतिषी, प्राच्य एवम् पाश्चात्य साहित्य दर्शन व्याकरण और वेद वेदांत के प्रकाण्ड विद्वान के रुप में हुई।
इलाहाबाद के म्योर सेन्ट्रल कालेज से बीए और एल0एल0बी0 करने के उपरांत नैनीताल में वकालत की वे उन दिनों कुमाऊं के ख्याति प्राप्त वकीलों में गिने जाते थे। अपने समय की राजैनिक हलचलों में वे सक्रिय रहे तथा बंग भंग आन्दोलन में सक्रिय भाग लिया बाद को पण्डित मदन मोहन मालवीय के आग्रह पर सक्रिय वकालत और राजनीति छोड़ काशी चले आये और वहां पर उन्होंने काशी हिन्दू विश्व विद्यालय में आचार्य के पद पर अल्प वेतन पर नियुक्ति स्वीकार की और प्राच्य शिक्षा के नये स्वरुप को निर्धारित करने तथा ​धर्म शिक्षण व संगठन में लगे रहे। अखिल भारतीय सनातन धर्म महामण्डल के प्रधान मंत्री के रुप में आपने लगभग 23 वर्ष तक अनेक परिषदों का संचालन किया तथा भगवान दास की कमेटी की सदस्यता से आपने वाराणसी में संस्कृत विश्वविद्यालय के स्वरुप को स्थिर करने में महत्वपूर्ण कार्य किया।
आपकी रचनायें अधिकतर संस्कृत में ही थी आपके कुछ ग्रन्थ गंगा महिम्न, राम महिम्न एवं अंतरंग मीमान्सा उनके समय में प्रकाशित हो गये थे तथा उत्तर प्रदेश सरकार से तब उन्हें अंतरंग मीमान्सा के लिए 1500 रुपये की आर्थिक सहायता भी प्राप्त हुई थी। इसके अतिरिक्त भी आपने अनेक महाकाव्य नाटक आदि लगभग 20 ग्रन्थ लिखे थे जैसे राम रसायन महाकाव्य स्वमंतकम् महाकाव्य, संगीत राघवम्, परशुराम चरित नाटक, कृतार्थ कौशिक नाटकम्, खगोल ज्ञान मंजूषा, सर्वदर्शन मंजूषा, सत्य सवित्रिम् जो धनाभाव के कारण अप्रकाशित है। 8 जून 1965 को 85 वर्ष की आयु में आपका निधन हो गया।

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