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अफसोस, महिला मुखिया होने के बाद भी महिला कल्याण में ही उपेक्षित हो रही है निराश्रित महिला संविदा कर्मी

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जहां एक और सरकार ने पीआरडी होमगार्ड का मानदेय में बढ़ोतरी कर उनके चेहरों पर मुस्कान लाई गई, वहीं दूसरी ओर महिला सशक्तिकरण बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का ढिंढोरा पीटने वाला महिला कल्याण विभाग में ही खुद महिलाओं की अनदेखी की जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राज्य में महिला कल्याण विभाग की मुखिया भी एक महिला मंत्री होने के बावजूद भी महिला कल्याण विभाग में संविदा में कार्यरत लगभग 12 सालों से संविदा में कार्यरत महिला कर्मियों की सुनने वाला कोई नहीं है सभी विभागों में जहां संविदा कर्मियों की मानदेय मानदेय में बढ़ोतरी हुई। वही महिला कल्याण विभाग में आज भी यह संविदा कर्मी महिलाएं मात्र 8000 में अपना गुजारा कर रही है जबकि सरकार द्वारा की गई मानदेय बढ़ोतरी के तहत होमगार्डों को ₹21000 पीआरडी जवानों को ₹15000 प्रतिमा मानदेय दिया जा रहा है और अन्य विभागों में संविदा कर्मियों को भी मानदेय में बढ़ोतरी की गई है लेकिन महिला कल्याण विभाग में आज भी इन चतुर्थ श्रेणी के संविदा कर्मियों को मात्र ₹8000 ही दिया जा रहा है जबकि अन्य विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी लगभग 15000 मानदेय दिया जा रहा है। अब सवाल यह पैदा होता है कि आखिर महिला कल्याण विभाग में जब खुद महिला कल्याण विभाग की मुखिया महिला हो तो इस विभाग में महिलाओं की इस तरीके से उपेक्षा हो रही हो यह बात समझ से परे है यही नहीं यह संविदा कर्मी निराश्रित होने के साथ-साथ इन्हीं संस्थाओं में पल बढ़कर बड़ी हुई है, जबकि नियमानुसार 10 साल संविदा में कार्य कर चुके किसी भी संविदा कर्मी को नियमित किया जाने का नियम है लेकिन यहां नियमित नियुक्ति तो दूर की बात इन संविदा कर्मियों को बढा हुआ मानदेय भी नही मिल रहा है । बार-बार गुहार लगाने के बाद भी ना अधिकारी ना मंत्री कोई भी इनकी बात सुनने वाला नहीं है और प्रकाश में यह आया है कि इनसे जूनियर संविदा कर्मियों को ऊंची रसूख और पैसे के बलबूते पर 2017 में ही नियमित नियुक्तियां दे दी गई है. यही नहीं अपनी बातों को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने पर निराश्रित संविदा कर्मियों को संबंधित अधिकारियों के द्वारा नौकरी से निकालने की चेतावनी दी जाती है। जबकि रात दिन इन संविदा कर्मियों से काम नियमित कर्मचारियों के बराबर ही लिया जाता है दूसरी ओर महिलाओं की स्थिति सुधारने के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार क्या कभी इनकी बात को सुनेगी यह बडा सवाल है

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