June 15, 2021

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गोपालबाबू गोस्वामी का नाम पद्म पुरस्कारों से नदारद होने पर सामाजिक कार्यकर्ता मोहन चंद्र उपाध्याय ने मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जताया रोष

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अल्मोड़ा। बीते सप्ताह गणतंत्र दिवस के मौके पर घोषित होने वाले पद्म पुरस्कारों में इस बार भी महान लोकगायक गोपाल बाबू गोस्वामी का नाम नदारद होने से कलाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवी वर्ग में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। उत्तराखण्ड के “ग्रामीण विकास जनसंघर्ष समिति” के कार्यकारी निदेशक मोहन चंद्र उपाध्याय ने इस मामले में अपना खुला आक्रोश राज्य सरकार और केंद्र के समक्ष भी प्रकट कर दिया है। उपाध्याय ने उत्तराखण्ड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, गृहमंत्री अमित शाह तथा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर स्व• गोपालबाबू गोस्वामी को राष्ट्रीय सम्मान से वंचित रखने के अफसोसजनक फैसले पर अपना कड़ा ऐतराज जताते हुऐ, लोक कला के क्षेत्र में स्व• गोपालबाबू के द्वारा समाज के लिये किये गये श्रेष्ठ योगदान को याद दिलाया। लोकगायक स्वर्गीय गोपालबाबू गोस्वामी के 79वें जन्मदिन की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री को भेजे गये अपने शिकायत पत्र में समाजिक कार्यकर्ता उपाध्याय ने हिमालय सुर सम्राट गोपाल बाबू गोस्वामी के साथ राष्ट्रीय पुरस्कारों में हुये घोर अत्याचार का उल्लेख करते हुये प्रधानमंत्री मोदी से इस मामले पर हस्तक्षेप कर महान लोकगायक गोस्वामी को मरणोपरांत राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करने की माँग दोहराई। सामाजिक कार्यकर्ता उपाध्याय ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री को सम्बोधित करते हुऐ लिखा है, कि,हिमालय सुर सम्राठ के नाम से विख्यात महान लोकगायक, गीतकार, लेखक, उद्घोषक तथा समाज सुधारक स्वर्गीय गोपालबाबू गोस्वामी के लिये आम जनता की गुहार के बाबजूद आज तक किसी भी सरकार ने ना तो जीते जी और ना ही उन्हें मरणोपरांत किसी भी राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया है। जबकि समाज कल्याण और राष्ट्रहित सर्वोपरि के सिद्धान्त पर आजन्म समर्पित रहे गोपालबाबू गोस्वामी ने अपनी लेखनी और सुरों का इस्तेमाल कर आम जनमानस के मन मस्तिष्क पटल पर एक ऐसी प्रेरणाप्रद और अमिट छाप छोड़ी की लाखों लोगों ने उन्हें अपना आदर्श गायक मानकर उनके प्रकृति प्रेम,देश प्रेम,दया,करुणा,सदाचार,सामाजिक समरसता,अंत्योदय समाजसेवा से जुड़ी बातों को आत्मसात किया।
अपने शिकायत पत्र में स्व• गोस्वामी की प्रतिभा का उल्लेख करते हुऐ उपाध्याय ने कहा कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी गोपालबाबू गोस्वामी भारत के कला जगत में सदी के एकमात्र ऐसे कलाकार थे, जो स्वयं ही अपनी चमत्कारिक लेखनी से सामाजिक प्रेरणा के कालजयी गीतों को लिखते थे और स्वयं अपने शाश्वत मंत्रमुग्ध सुरों से इस तरह गाते थे कि उनके द्वारा गायी गयी लगभग सभी रचनायें सुपरहिट होकर अमर साहित्यिक कृतियों में दर्ज हुई। उन्होंने 80 के दशक में ही अपने लोकगीतों के माध्यम से ग्रामीण भारत से हो रहे भीषण पलायन,हिमालयन पहाड़ी राज्यों की पीड़ा,जनसंख्या, बेरोजगारी, जल, जंगल, पर्यावरण प्रदूषण, पाश्चात्य सभ्यता और भारतीय समाज में आ रहे खौफनाक विकृतियों,नारी पीढ़ा आदि सभी ज्वलंत मुद्दों से देश को सावधान रहने की चेतावनी जारी कर दी थी,जिन समस्याओं से आज देश अब बूरी तरह जूझ रहा है। गोपालबाबू गोस्वामी के जन्मदिन पर सामाजिक कार्यकर्ता तारा दत्त शर्मा,गिरीश चंद्र जोशी,पंजाब हाईकोर्ट के अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय,उत्तराखण्ड हाईकोर्ट बार के प्रेसीडेंट अधिवक्ता पूरन सिंह बिष्ट, IIT रिसर्च स्कॉलर भूवन उपाध्याय,सामाजिक कार्यकर्ता केश्वदत्त जोशी, गोविंद बल्लभ उपाध्याय, दयाल पांडेय,मधु पांडेय,मनोरथ उपाध्याय सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्वर्गीय गोपालबाबू गोस्वामी को राष्ट्रीय पुरस्कार देने की माँग की।

अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर आर जी नौटियाल का संदेश

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