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भ्रष्टाचार निवारण दिवस पर विशेष, हमने घूस नहीं देनी चाहिए ​चाहे हानि ही क्यों न उठानी पडे

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(शक्ति 31 दिसम्बर 1949 से साभार)

तारीख 18 को सोमेश्वर में हरी कृष्ण पाण्डे जी के सभापतित्व में एक सभा हुई। सभापति ने अल्मोड़ा से आये ​हुवे वयोवद्ध नेता बद्रीदत्त पाण्डे, हर गोविंद पंत, भूपाल सिंह खाती और प्यारे लाल गुप्ता का अभिनंदन और स्वागत किया।
बद्रीदत्त पाण्डे ने अभिनंदन का उत्तर देते हुवे कहा कि गांधी जी ने सदा सेवा का मार्ग बताया न कि नेतागिरी का। मैं जनता का सेवक हूं। आपने कहा कि यहां बहुत दिनों बाद आ रहा हूं। इस स्थान को देखकर मेरी पुरानी स्मृतियां ताजा हो उठी है। कुली बेगार को बहा देने के बाद यह सारी घाटी चेतना से भर उठी थी। तत्कालीन डिपटी कमिशनर ने मुझसे कहा था कि तुम बगावत कर रहे हो, हम तभी से इस कार्य में लगे है। तब यह ख्याल भी नहीं आया कि हम अपने लक्ष्य तक इतने जल्दी पहुंच जायेगें और हमे यह सम्मान मिलेगा। आज महात्मा जी की कृपा से हमारे लिए सभी रास्ते खुल गये है और लार्ड गर्वनर सभी कुछ हम बन सकते है।
देश के विभाजन का जिक्र करते हुवे आपने कहा कि देश को बांट कर अग्रेजों ने खोखला कर दिया जिसके कारण हम अनेक समस्याओं में उलझ गये है। पिछली लड़ाई के समय उन्होंने 14 अरब रूपया जो पाउन्ड पावना कहलता है। अन्न
संकट के विषय में आपने बतलाया कि यह विश्वव्यापी है। अंग्रेज जो अभी तक हर प्रकार शक्ति शाली ​थे वह भी आज इसके ग्रास है। आपने बताया कि सरकार को 1800 करोड़ केवल अन्न् मगाने मे व्यय करना पड़ रहा है। इस संकट को दूर करने के लिए आपने कृषि पर जोर देते हुवे कहा कि पहाड़ो में लोगों को सामूहिक कृषि को अपना चाहिए। हुडकियाबैल कोई पुरानी चीज नहीं है। यदि गांव वाले मिल कर खेती कर लें तो हमारी उपज में वृद्धि हो सकती है। कोसी की घाटी की भूमि को आपने सोने की बताते हुवे कहा कि इसकी गांधी जी ने भी प्रशंसा की है।
देश की दूसरी बड़ी समस्या रियासतों के प्रश्न पर आपने कहा कि यह हमारे नेता सरदार पटेल और नेहरू की ही नीति का फल है कि यह देश सैकड़ो पकिस्तान बनने से बच गया जैसा की अंग्रेजों का इरादा था। अंत में आपने कहा कि देश को सम्पन बनाने मे समय लगेगा हमने परिश्रम और संतोष से देश का निर्माण करना है। पंचायत राज व्यवस्था से हमें पूरा अवसर है कि हम अपना निर्माण स्वयं करें हममें चरित्र की कमी है सबसे पहले हमें उसी का निर्माण करना है। लूट पाट, छलकपट भारतीय संस्कृति के विरूद्ध है हमने घूस
नहीं लेनी चाहिए चाहे ​नुकसान ही क्यों नहीं उठाना पड़े हमे आत्म सम्मान को बढ़ाना है। हमें संगठित् होना है। पंचायतों द्वारा अधिकारो के दुरूप्रयोग से सचेत करते हुवे आपने कहा पंचायतों को न्याय करना है यदि पंचायते सफलता पूवर्क कार्य करने लगती है तो हमे स्वराज्य की पहली सीढ़ी चल गये है। यह बताते हुवे आपने सोत्राओं को पुन: सचेत किया कि देश का निर्माण शांति व्यवस्था और जन सहयोग से होगा।

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