May 26, 2022

Shakti Almora

-since from 1815

दीपावली पर्वों की श्रृंखला पर विशेष..

नरक चतुर्दशी — दीपावली पर्वों की श्रृंखला में धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी का पर्व आता है। दीपावली के ठीक एक दिन पूर्व मनायी जाने वाली नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली, रुप चौदस या काली चतुर्दशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण चर्तुदशी के दिन विधि विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस पर्व के पीछे पौराणिक मान्यता: है कि आज ही के दिन भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी, दुराचारी असुर नरकासुर का वध किया तथा सोलह हजार एक सौ कन्याओं को दुराचारी नरकासुर के बंदीगृह से मुक्त करा कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस दिन के पूजा और व्रत के सम्बंध में एक दूसरी कथा का भी वर्णन आता है कि राजा रन्तिदेव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। जिन्होंने अनजाने में भी कभी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके समक्ष यमदूत आ खड़े हुये। यमदूतों को सामने खड़ा देख राजा अचंभित हुये और बोले कि मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आये हो? क्योंक आपके आने का अर्थ है कि मुझे नरक में जाना होगा। आप कृपा कर मुझे बताये कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक में जाना पड़ रहा है। यह सुनकर यमदूत ने कहा कि राजन एक बार आपके द्वार से एक ब्राहमण भूखा लौट गया था। यह उसी पाप कर्म का फल है। इसके बाद राजा ने यमदूत से एक वर्ष का समय मांगा। राजा ने रिषि मुनियों के पास जाकर इस पाप से मुक्ति का समाधान पूछा तब रिषियों ने कहा कि आप कार्तिक मास की कृष्ण चर्तुदशी का व्रत करें और ब्राहमणों को भोजन करा कर उनके प्रति हुये अपराध के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने ऐसा ही किया इस प्रकार राजा पाप से मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उसी दिन से पाप और नरक से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चर्तुदशी के दिन का व्रत प्रचलित है। इन्हीं कथाओं को ध्यान में रखकर नरक चर्तुदशी का पर्व मनाया जाता है।
— जगदीश जोशी

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.