May 26, 2022

Shakti Almora

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बीते दिनों की बात हो गई बल्ढ़ोटी के पत्थर

बात बहुत पुरानी है— अल्मोड़ा नगर के समीप ही फलसीमा जाने वाले मार्ग के बीच में बल्ढ़ोटी नामक स्थान पत्थरों के लिए मशहूर था। यहां के पत्थर जो कि छत निर्माण में सवर्दा उपयुक्त माने जाते थे तब अल्मोड़ा नगर और उसके लगे क्षेत्रों में इतने कंकरीट सीमेण्ट के मकान नहीं थे जो आज सीमेण्ट—कंकरीट के जंगलों में परिवर्तित हो गया। बल्ढ़ोटी के पत्थर छत हवाई के लिए जनपद के बाहर भी जाते थे लमगड़ा 115 वर्ष पूर्व अल्मोड़ा अखबार में जो सामग्री प्रकाशित हुई उसके अंश निम्नवत है।
11 लोगों का कहना है बल्ढ़ोटी के समान हवाई के पत्थर शायद ही भारत के किसी दूसरे स्थान पर निकले है।— कभी कभी तो दस फीट लम्बे पत्थर निकलते है पहाड़ी क्षेत्रों में गर्मियों में अधिक गरम व जाड़ों में अधिक ठण्डी नहीं होने पाती—धूप से कपे व अभ वस्मादि सुखाने के लिये यह छत उपयुक्त होती है एक मकान के पत्थर सुमता से फिर दूसरे मकान के काम आ सकते है।

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