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शक्ति न्यूज अल्मोड़ा |

1918 से प्रकाशित शक्ति अखबार का डिजीटल प्लेटफार्म

एक फायर के तीन शिकार

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वर्ष 1871 से प्रकाशित अल्मोड़ा अखबार अप्रैल 191 में बंद हो गया इस अखबार के बंद होने की भी दिलचस्प कहानी है।-हुआ यह कि तत्कालीन अंग्रेज डिप्टी कमिष्नर लोमस अप्रैल 1918 में स्याही देवी में शिकार के बहाने एक मेम से रंगरेलिया मना रहा था कुली शराब व सोडा लेकर देर से आया तो लोमस आग बबूला हो गया उसने बंदूक तान दी छर्रा कुली को लग गया यह समाचार अल्मोड़ा अखबार में छप गया-उसने ‘अल्मोड़ा अखबार’ के संपादक बद्रीदत्त पाण्डे को बुलाया वे नहीं गये अखबार के तत्कालीन मुद्रक प्रकाशक मुंशी सदानन्द सनवाल को बुलाया और धमका कर उनसे मुद्रक प्रकाशक का त्याग पत्र लिखवा लिया सारे शहर में आतंक फैल गया और अल्मोड़ा अखबार बंद हो गया लोमस ने अपने बचाव में यह बात कही कि उसने फायर मुर्गी पर किया कुली पर लग गया तब अप्रैल महीने में शिकार खेलना गैर कानूनी था।
अल्मोड़ा अखबार के बंद होने पर व्यंगपूर्ण टिप्पणी करते हुए दुगड़ा से प्रकाषित होने वाले ‘गढ़वाल समाचार’ के सम्पादक गिरिजा दत्त नैथानी ने लिखा था। ‘‘एक फायर के तीन शिकार कुली मुर्गी और अल्मोड़ा अखबार
अल्मोड़ा अखबार बंद हो जाने पर बद्रीदत्त पाण्डे को बड़ा धक्का लगा तथा उन्होंने शोक प्रगट करने के लिये हरिद्वार जाकर अपनी मूछें मूढ़ा डाली उन्होने इस बारे स्वयं कहा था कि ‘‘मैंने देश द्रोहियों का श्राद्ध कर एक बालू का पिण्डदान किया है और यह प्रतिज्ञा गंगा तट पर भी है हे! मत गंगे! जिन देश द्रोहियों ने अल्मोड़ा अखबार की अन्त्येष्टि की उनको सद्बुद्धि दे जब तक दूसरा पत्र अल्मोड़ा से न चलाऊंगा मूंछ न रखूंगा मूंछ मनुष्यता का चिन्ह है मर्द होकर पुरुषार्थ न किया तो धिक्कार इस जन्म को पर दशहरे के दिन एन केन प्रकारेण 2 पन्नों का शक्ति अखबार का प्रकाशन प्रारम्भ किया जो आज तक प्रकाशित हो रहा है।

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