June 15, 2021

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अल्मोड़ा पुलिस का सराहनीय प्रयास – मिशन हौसला के अन्तर्गत पुलिस विभाग द्वारा रक्तदान

वनाग्नि को रोकने के​ लिए ग्राम सभा स्तर पर आम आदमी को होना पड़ेगा जागरूक— जिलाधिकारी

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जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया नेे आज जिला कार्यालय में वनाग्नि से सम्बन्धित आयोजित एक बैठक ली। बैठक में जिलाधिकारी ने वनों को राष्ट्रीय बहुमूल्य संपदा बताते हुवे वनाग्नि से होने वाले वन संपदा की क्षति पर चिंता व्यक्त करते हुवे कहा कि वनों को वनाग्नि से रोकने के लिये यद्यापि वन विभाग द्वारा प्रभागीय स्तर पर वन प्रबन्धन अग्नि योजना का प्रभावी ढ़ग से तैयारी की जाती है फिर भी अगर ग्राम स्तर पर प्रत्येक व्यक्ति वनाग्नि के प्रति जागरूक हो तो इसे रोका जा सकता है। अकेले वन विभाग ही वनाग्नि से निपटने में असमर्थ है।


जिलाधिकारी ने बैठक को सम्बोधित करते हुये कहा कि वनाग्नि से रोकथाम के लिये एन0सी0सी0, एन0डी0आर0एफ0, महिला मंगल दल, युवक मंगल दल, वन पंचायत और स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आकर इसके नियंत्रण में भागीदारी करनी होगी। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा विभाग को हर सम्भव मद्द दी जायेगी जो कि इसके प्रभावी नियंत्रण में सहयोग प्रदान करेंगी। उन्होंने कहा कि महिला मंगलदल, युवक मंगल दल द्वारा अच्छा कार्य करने पर उनको पुरस्कृत किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जंगलों में आग लगने के प्रमुख कारणों में नई घास के लिये सूखी घास को जलाना, जंगलों में आने-जाने वाले लोगों द्वारा जली बीडी सिगरेट को फैंकना और बिखरी पत्तियों को जलाना है। इसके लिये प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को जागरूक किया जाय ताकि वनाग्नि को रोका जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि काल के समय कुछ शरारती तत्वों द्वारा भी जान-बूझ कर आग लगायी जाती है ऐसे लोगों को चिन्हित कर उन पर कडी कार्यवाही की जाय। उन्होंने कहा कि फायर सीजन शुरू होने के पहले वन विभाग द्वारा एक फायर माॅक ड्रिल का आयोजन कराया जाय जिससे लोगो में वनाग्नि को लेकर जागरूकता पैदा हो सके।
जिलाधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को ग्राम स्तर पर जागरूकता गोष्ठी कराने को कहा। उन्होंने कहा कि कृषि, उद्यान एवं विकास विभाग के अधिकारी इन जागरूकता गोष्ठियो ंमें अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करेंगे। जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री त्वरित समाधान शिविरों में वन विभाग द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किये जाय। उन्होंने कहा कि सिविल वनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सम्बन्धित ग्राम प्रधान व पटवारी की होगी। उन्होंने कहा कि वनग्नि नियंत्रण में मानव संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है इसलिये कृषि, राजस्व, विकास, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, जल निगम, अग्निश्मन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पशु पालन, आपदा प्रबन्धन, स्थानीय अभिसूचना ईकाइ, छावनी परिषद, एसएसबी से स्वतःस्फूर्त भावना से इस कार्य में जुटने की बात की।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी महातिम यादव ने कहा कि वनाग्नि से निपटने के लिए सभी विभागो से सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने बताया कि फायर सीजन 15 फरवरी से 15 जून तक रहता है इसलिए हमें इस दौरान और जागरूक रहने की आवश्यकता है। उन्होंने विभाग द्वारा वनाग्नि को रोकने के लिए किये जाने वाले प्रयासो व कार्य योजनाओं को पाॅवर पाइंट के माध्यम उपस्थित लोगो को जानकारी दी। इस अवसर पर उपस्थित वन पंचायत के संरपचों द्वारा अपने सुझाव दिये गये।
बैठक में वनाधिकारी सिविल सोयम आर0सी0 काण्डपाल, उप प्रभागीय वनाधिकारी भूपाल सिंह बिष्ट, वन क्षेत्राधिकारी संचिता वर्मा, अधिशासी अभियन्ता लोनिवि एम0सी0 जोशी, मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह, ई0ओ0 नगरपालिका श्याम सुन्दर, गिरीश चन्द्र शर्मा, कैलाश नाथ गोस्वामी, हरीश बिष्ट, लीला बोरा सहित अनेक सरपंच व अधिकारी उपस्थित थे।

अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर आर जी नौटियाल का संदेश

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