August 9, 2022

Shakti Almora

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आज का विचार-कल को छोड़ कर, कल से सीख कर, आज को जीना ही जीवन है।

इस जीवन मे किसी को भी पूरी खुशी या हर तरह से संपन्नता वाला जीवन नही मिलता है। मिल भी नही सकता। जीवन मे किसी न किसी तरह की अपूर्णता मिलती ही है। किसी के पास पैसा है, तो स्वास्थ्य नही है, कोई कुरूप है। हर तरह से समृद्ध जीवन केवल कल्पना में ही है। या ये कहे कि अपनी कमी को भर लेने के लिए ही मनुष्य के जीवन मे इतनी भाग दौड़ है, इतनी अशांति है। हर आदमी सोचता है कि शायद भविष्य में वो हर तरह से सम्पन्न हो जाएगा। इसके लिए ही इतनी भविष्य की कल्पनाएं है।

नहीं पूरा यहाँ किसी को भी नही मिलता है, कुछ न कुछ, कहीं न कहीं कमी रह ही जाती है.!
भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध, गुरु नानक देव, मीरा, कबीर, इसा मसीह सभी के जीवन दुःख मय रहे हैं.! लेकिन जो व्यक्ति दुखों के साथ रहते हुए, परमात्मा को समर्पित होकर, अपने आदर्शो के साथ जीता है, उसके लिए ही जीवन के परमरहस्य के द्वार खुलते है।

किसी भी परिस्थिति मे खुश रहना ही जीवन मे सुख का एहसास करा सकता है, कभी बीते हुए कल को न उद्देरें, नहीं तो दुःख होगा.! बेहतर आज के लिए, बीते हुए कल की गलतियों से हमें सीख अवश्य लेना चाहिए। सुख के लिए, हमें कल को छोड़ कर, कल से सीख कर आज को जीना है, आज मे सांस लेना होगा.! वर्तमान में जीकर कर पूर्ण रूप से, आनदमय ढंग से जिया जा सकता है।

रमेश सिंह पाल