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क्या महानुभावों की तरह महिला कल्याण विभाग में निराश्रित महिला संविदा कर्मियों पर भी मेहरबान होगी त्रिवेंद्र सरकार?

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एक तरफ जहां मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री व तमाम दायित्वधारियों पर सुख सुविधाओं के नाम पर लाखों रूपये खर्च किये जा रहे है जिसमें एक मंत्री को सब ​कुछ जोड़कर लगभग साढे तीन लाख रूपये हर महीने मिलते है। वहीं विंडबना देखे राज्य में विकास का ढ़िढोरा पिटने व आम जनता के खुशहाली की बात करने वाली सरकार के दावों की पोल तब खुलती है जहां एक मंत्री को मात्र टेलीफोन भता लगभग 15 हजार रूपये मिलता है महिला कल्याण विभाग में पिछले 12 सालों से संविदा पर कार्य करने वाली निराश्रित महिलाएं जो इस मंहगाई के दौर में मात्र 8 हजार रूपये में अपना गुजर बसर कर ​रही है। जबकि वही नियमावली के अंतर्गत आने पर भी इन संविदा कर्मियों को आज ​तक नियमित नियुक्ति दिया जाना तो दूर की बात, बढ़ा हुवा मानदेय जो कि उत्तराखंड मुख्य वित्त नियंत्रक सविता तिवारी के पत्र दिनांक 11/06/2018 के तहत संविदा ​कर्मियों को दिया जाने वाला मानदेय 8300 प्रतिमाह को बढ़ाकर 13425 रूपया किया गया है जो आज 2 साल 6 माह गुजर जाने के बाद भी आज तक बढा हुवा मानदेय ​नहीं मिल पाया है जहां त्रिवेंद्र सरकार आज तक बढा हुवा मानदेय इन संविदा ​कर्मियों को नहीं दे पायी है और वहीं बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं महिला स​शक्तिकरण का ढ़ोल पिटने वाली त्रिवेंद्र सरकार अपने राजनेताओं का खुश करने में लगी है। जिसमें त्रिवेंद्र सरकार द्वारा नया वर्ष शुरू होने के ठीक एक महीने पहले 11 महानुभावों दायत्विधारी बनाकर नया साल का तोहफा देकर ये साबित कर दिया है कि सरकार को आम जनमानस से लेना देना नहीं है। इससे यह साफ हो जाता है कि आम जन मानस कि विकास और खुशहाली की बात करने वाली प्रदेश सरकार को अपने महिला कल्याण विभाग में ही कार्यरत निराश्रित महिलाओं की समस्या नजर नहीं आ रही है, तो बेटी बचाओ बेटी, पढ़ाओं को क्या महत्व? जबकि महिला कल्याण विभाग में निराश्रित महिला की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है। ​तमाम समाचार पत्रों में प्रकाशित किये जाने के बाद भी आज तक इन संविदा कर्मियों की समस्याएं वैसी की वैसी है और उपर से अपनी समस्याओं को अपने विभाग से बाहर पहुंचाने पर इन संविदा कर्मियों को नौकरी से निकाले की धमकी इनकी उच्च अधिकारियों द्वारा दी जाती है। अब ऐसे में इस सरकार पर भरोसा व उम्मीद की नजर लगाये हुवे इन संविदा ​कर्मियों की त्रिवेंद्र सरकार क​ब सुध लेगी यह देखने वाली बात होगी।

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