November 14, 2021

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27 अगस्त शुक्रवार आज बीरूड पंचमी जानिये मान्यता के अनुसार क्या है बिरूड़ पंचमी

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रिपार्ट । एसएस कपकोटी/ पंडित केवलानंद जोशी
अल्मोड़ा । 27 अगस्त शुक्रवार यानि आज है बिरूड़ पंचमी, इस दिन तांबे के बर्तन में पांच प्रकार के अनाज भीगाए जाते हैं । बर्तन के बाहर से पांच जगह गोबर दूर्वा लगाया जाता है। 29 अगस्त रविवार अमुक्ता भरण सप्तमी इस दिन बिरूणों को धोकर उसके जल से स्नान किया जाता है यह आगामी फसल की अच्छी उपज एवं प्रकृति का पूजन का भी प्रतीक है।
देव भूमि उत्तराखंड जहां हिमालय शिव का प्रिय स्थान है। अ-मुक्ता भरण सप्तमी के दिन हिमालय पुत्री गौरा एवं महेश को प्रकृति से उत्पन्न ज्वार बाजरा मक्का आदि के पौधों से गौरा महेश्वर का निर्माण कर वस्त्रों आभूषणों से सजाया जाता है ।झांकियां निकालकर फिर पूजा स्थल पर ब्राह्मण द्वारा प्राण प्रतिष्ठा एवं विधि विधान से पूजा की जाती है । इस दिन गौरा अपने मायके आई रहती हैं। महेश से विवाह कर इन्हें ससुराल विदा किया जाता है। यह पर्व अगस्तौदय से पूर्व होने वाला व्रत है। सातों, आठो के नाम से भी इसे जाना जाता है।
सप्तमी के दिन 7 गांठ का डोर बाए हाथ में प्रतिष्ठा कर पहना जाता है । जिसका मतलब विवाह के सात फेरे, संगीत के सात सुर ,सप्त ऋषि, सात बार ,सात समुद्र एक एवं सात बहुओं की कथा के वर्णन से संबंधित है एवं देवकी के साथ संतानों के क्षय कंस के द्वारा होने से संबंधित भी है । यह संतान सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है देवकी ने भी 7 संतानों की क्षति के पश्चात यह व्रत किया था। इसलिए संतान प्राप्ति के लिए ”देवकीसुत गोविंदंवासुदेव जगत्पते देहि में तनयं कृष्ण त्वामहंशरणांगतम” इस मंत्र को जपकर महिलाएं अपने संतान की रक्षा एवं पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए इस पूजन को करती हैं

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