November 20, 2021

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73 वर्ष पूर्व अतीत के पन्नों से— कैसे हुवा तिरंगा झंडा ही स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय झंडा

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-कैलाश पाण्डे पत्रकार
भारत 15 अगस्त को 74वां स्वतंत्रता दिवस मनायेगा किन्तु वर्तमान पीढ़ी को यह ज्ञात होना चाहिए कि जो भारत का आज राष्ट्रीय झंडा है वह किस प्रकार राष्ट्रीय झंडा स्वीकृत हुआ। इसका विवरण शक्ति के 29 जुलाई 1947 के कुछ अंश को हम जानकारी के लिए उद्धृत कर रहे है।
कांग्रेस वर्किग कमेटी ने 20 जुलाई 1947 को अपने अधिवेशन में एक प्रस्ताव पारित करके घोषित किया कि 15 अगस्त को उत्सव मनाया जाय तथा कहा कमेटी इस बात को पूर्णत: अनुभव करती है कि भारत में ब्रिटिश शासन की समाप्ति एक ऐतिहासिक घटना है जो विश्व व्यापी महत्व रखती है। भारत में ​ब्रिटिश शासन की समाप्ति के फलस्वरूप हमारे देश वासियों के लिए स्वतंत्रता तथा शुभअवसर का द्वार खुल गया है जिसके परिणाम राष्ट्रीय तथा अंतराष्ट्रीय मामलों में बहुत महत्वपूर्ण होंगे। इसके द्वारा देश वासियों की अभिलाषाओं के अनुसार भारत ने अपने लक्ष्य की बहुत कुछ प्राप्ति कर ​ली है और उसे अपने विकास करने का अवसर मिल गया है।


कमेटी की राय है कि इस घटना के उपलक्ष्य में देश भर में उत्सव मनाया जाय। इस विचार से कमेटी यह सलाह देती है कि 1— 15 अगस्त को सार्वजनिक छुट्टी का दिन घोषित किया जाय 2— सार्वजनिक तथा व्यक्तिगत इमारतों पर राष्ट्रीय झंडा फहराया जाय। 3— अपराहं में सार्वजनिक सभाएं की जाय और जनता को इस​ दिवस का महत्व समझाया जाय। 15 अगस्त को पुराने युग का अंत और एक नये युग का आरंभ होता है। यह कमेटी देश वासियों से अपील करती है कि भारत के इतिहास में इस नये युग का श्रीगणेश अनुशासन तथा विश्वास पूर्वक संकल्प के साथ, देश के प्रत्येक नागरिक को— चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या वर्ग का हैं— पूर्ण स्वतंत्रता तथा विकास का अवसर प्रदान करेंगे।
22 जुलाई को नई—दिल्ली में विधान सम्मेलन में निश्चय किया​ कि कांग्रेस का — केशरिया सफेद हरा— तिरंगा झंडा भारत का राष्ट्रीय झंडा होगा और इसके बीच में अशोक का धर्म चक्र अंकित रहेगा।
पंडित जवाहर लाल नेहरू ने जिस समय विधान सभा में आज तिरंगे झंडे को जिसके बीच में सम्राट अशोक का चक्र रहेगा व भारतीय यूनियन का झंडा स्वीकृत करने के लिए प्रस्ताव पेश किया। उस समय महात्मा गांधी के जय नाथ से विधानसभा भवन गूज उठा।
पंडित नेहरू ने प्रभावशाली भाषण देते हुए कहा कि यह बडे गर्व की बात है कि— आज जिस झंडे को आपके बीच प्रस्तुत कर रहे है व किसी साम्रराज्य का झंडा नहीं है, वह सम्रराज्यवादी झंडा नहीं है व दूसरे राष्ट्र पर प्रभुत्व स्थापित करने का झंडा नहीं है बल्कि वह स्वतंत्रता का सच्चा प्रतीक है वह हमारे लिए ही नहीं बल्कि सबके लिए स्वतंत्रता का प्रतीक है (हर्ष ध्वनि) जहां ​भी यह झंडा जायेगा— और मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह झंडा केवल वहीं नहीं जायेगा जहां भारतीय रहते हैं अथवा हमारे राजदूत रहेंगे बल्कि दूर, बहुत दूर हमारे जहाजों पर लहराता हुवा यह झंडा जायेगा और इस झंडे के द्वारा स्वतंत्रता, आशा और बधुत्व का संदेश हम संसार के​ विभिन्न देशों में पहंचायेगे। इस झंडे के द्वारा हम यह संदेश देगे की भारत सारे संसार का मित्र होकर रहना चाहता है और जो देश गुलाम है उन्हें आजाद होने में साहयता पहुचाना चाहता है यह झंडा आजादी, दोस्ती, आशा और बधुत्व का प्रतीक है यही झंडा हमारा राष्ट्रीय गौरव है।

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