October 11, 2021

शक्ति न्यूज अल्मोड़ा |

1918 से प्रकाशित शक्ति अखबार का डिजीटल प्लेटफार्म

जरुर पढ़े अल्मोड़ा रही है अखबारों की जननी

1 min read
546778f3-c32c-455b-a331-27f23100882a
27673308-6ab7-4439-9875-5ca44b4946e1
previous arrow
next arrow

अल्मोड़ा का धार्मिक भौगोलिक और ऐतिहासिक महत्व कई दिशाओं में अग्रणी रहा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी अल्मोड़ा समस्त कुमाऊं अंचल का प्रतिनिधित्व करता रहा। इसके लिए अल्मोड़ा को कुमाऊं की सांस्कृतिक राजधानी के नाम से भी जाना जाता रहा। अल्मोड़ा का महत्व इतिहास में कभी कम नहीं रहा क्योंकि अपनी सांस्कृतिक व बौद्धिक गतिविधियों के कारण न केवल इस पहाड़ी भू—भाग की सांस्कृतिक राजधानी रही। वरन् 3 सदी तक कुमाऊं की राजधानी रहने के कारण राजनीतिक गतिविधियों और जनजागरण का केन्द्र भी रही। इस ऐतिहासिक नगरी से गम्भीर उद्देश्य पूर्ण पत्रकारिता की शुरुआत 1871 में अल्मोड़ा अखबार से हुयी 47 साल प्रकाशित होने के बाद यह बंद हुआ 15 अक्टूबर 1918 को शक्ति अखबार का प्रकाशन हुआ जो अब तक प्र​काशित हो रहा है। 1919 में शक्ति की रीति नीति से असमहत होने पर भवानी दत्त जोशी ने ज्योति और 1924 में जय दत्त तिवारी ने कूर्मांचल मित्र अखबार शुरु किये वे जो जल्द बंद हो गये। उसके बाद लगभग 35 से अधिक पत्र पत्रिकाएं अल्मोड़ा से निकली जिनमें स्वाधीन प्रजा 1930, क्षमता 1935, उत्थान 1946, प्रजाबंधु 1947, कुमाऊं राजपूत 1948, रुपा और जनवाणी पाक्षिक 1952, लोक कला मासिक 1955, नाग राज 1962, जागृत युवक 1964, उत्तरकेसरी 1965, सत्य शांति संदेश 1965, स्वाधीन प्रजा का पुन: प्रकाशन 1966, विकास मासिक 1969, बद्रीनाथ 1970, द्रोणाचल प्रहरी द्वाराहाट कुंज राशन चिलियानौला हिमाद्री ​द्वीमासिक उत्तराखण्ड सेनानी 1972, हिमांजली पाक्षिक 1974, दस्तावेज पाक्षिक शिखर संदेश हिलास 1978, उत्तराखण्ड दूत पाक्षिक पूर्णागिरी संदेश उत्तराखण्ड राही अल्मोड़ा समाचार उत्तराखण्ड उद्घोष पर्वत बंधु जंगल के दावेदार कूर्मांचल समाचार व​न्चित स्वर पिंडारी मेल दिशा समन्वय शिल्पी मासिक पहरु मासिक बाल प्रहरी त्रिमासिक ज्ञान—विज्ञान बुलेटिन तराण व अखण्ड उत्तरांचल, अल्मोड़ा टाइम्स आदि प्रकाशित हुए।

Copyright © शक्ति न्यूज़ | Newsphere by AF themes.