January 12, 2022

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मौत अमीर से अमीर आदमी को गरीब के साथ खड़ा कर देती है

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मौत अमीर से अमीर आदमी को भी गांव के साधारण आदमी के साथ बराबर खड़ा कर देती है। मौत भिखारी और सम्राट को बराबर कर देती है । दोनों एक से पड़े रह जाते हैं । सम्राट और भिखारी की लाश में तनिक भर का भी तो फर्क नहीं होता दोनों धूल में पड़ जाते हैं और दोनों धूल में गिर जाते हैं ।लेकिन इससे बचने के लिए मनुष्य जाति ने एक भ्रम निर्मित किया है। मरने के बाद के लिए उसने अपनी सहूलियत के हिसाब से एक ओर संसार का निर्माण कर दिया है। जिसे हम लोग स्वर्ग या नरक का नाम दिया है। गलत आदमी को देखकर मनुष्य को बड़ी सहूलियत मिलती है। कि अपनी तो स्वर्ग में सीट पक्की है और ये तो नरक में ही जायेगा। लेकिन मैं कहता हूँ जी जब तक हम अपने असली स्वरूप को नही पहचान लेते तक तक चाहे हम कुछ भी करे चाहे परोपकार करे, चाहे किसी को दुख दे, चाहे दान करे या चोरी। सब बराबर है। जब तक हम अपने को शरीर से अलग होकर देखना सुरू नही करते तब तब मृत्यु के लिए सब बराबर हैं फिर चाहे वह किसी बड़े मंदिर का पुजारी हो या किसी बड़े शहर का बड़ा चोर। चाहे देश का राष्ट्रपति हो या सड़क का भिखारी। मृत्यु के लिए कोई भेद नही वो सभी को समान रूप से खाक में मिलाती फिरवो अमीर था कि गरीब था ? सफल था कि असफल था ? मौत उस सब को तोड़ देती है जो तुमने सपने की तरह बनाया था।

डॉ रमेश सिंह पाल 🚩

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