October 18, 2021

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होली में प्राकृतिक रंगों का उपयोग विषय पर परिचर्चा

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अल्मोड़ा। बालप्रहरी तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा द्वारा ‘होली में प्राकृतिक रंगों का उपयोग’ विषय पर आयोजित ऑनलाइन परिचर्चा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उत्तराखंड शिक्षा विभाग में उप निदेशक पद पर कार्यरत श्री आकाश सारस्वत ने कहा कि होली, दीपावली तथा दूसरे त्यौहार आपसे भाईचारे, प्रेम व खुशी के प्रतीक हैं। परंतु कुछ लोग दीपावली में बम पटाखे व आतिशबाजी करके दिखावा करते हैं तो कुछ लोग दीपावली में जुआ खेलना अपना अधिकार समझते हैं। उसी प्रकार होली में कुछ लोग नशे की ओर प्रवृत्त होते हैं तो कुछ लोग होली में कैमीकल मिले रंगों तथा गोबर व कीचड़ का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि हमें कैमीकल मिले रंगों का प्रयोग न करके घर में बने रंगों का प्रयोग करना चाहिए तथा गीले रंगों से बचना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन करते हुए पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार नैनीताल के कक्षा 11 के छात्र सुदर्शन सोराड़ी ने कहा कि खाने वाले रंग अपेक्षाकृत कम हानिकारक होते हैं। परंतु कपड़ा रंगने वाला रंग बहुत खतरनाक होता है। उन्होंने हैप्पी होली के बजाय सेफ होली के लिए प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करने को कहा। प्रारंभ में बालप्रहरी के संपादक तथा बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा केसचिव उदय किरौलाने सभी का स्वागत करते कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के अध्यक्ष मंडल में शामिल केंद्रीय विद्यालय पौड़ी के कक्षा 8 के छात्र श्रीमन भट्ट ने कहा कि कैमीकल मिले रंग जहां त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं आंखों के लिए भी ये रंग खतरनाक होते हैं। इससे आदमी अंधा भी हो सकता है। नोजगे पब्लिक स्कूल खटीमा की कक्षा 6 की छात्रा सिमरन गोबाड़ी ने घर में फूल व पत्तियों से रंग बनाने की बात कहीं तो आर्मी पब्लिक स्कूल अल्मोड़ा के कक्षा 6 के छात्र चैतन्य बिष्ट ने कहा कि कुछ लोग जबरदस्ती दूसरे की मर्जी के खिलाफ कैमीकल मिले रंग दूसरों को लगाते हैं जो कि सही नहीं है। रानी लक्ष्मीबाई पब्लिक स्कूल दतिया म.प्र. की कक्षा 6 की छात्रा सुविज्ञा शर्मा ने ने कहा कि पारिजात या हरश्रंगार के फूलों को पानी में भिगोकर केसर जैसा खूश्बू वाला रंग तैयार हो जाता है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय सेलाबगड़ की कक्षा 5 की छात्रा तथा बाल विकास विद्या मंदिर चौखुटिया की कक्षा 4 की छात्रा देवरक्षिता नेगी ने कहा कि उनके घर में हर साल बुरांस के फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार किया जाता है।
यूनिवर्सल कांवेंट स्कूल हल्द्वानी के कक्षा 4 के छात्र लक्ष्य उन्मुख कांडपाल तथा माउंट कार्मल स्कूल चंपावत की कक्षा 8 की छात्रा प्रांजलि लोहनी ने कहा कि कैमीकल मिले रंग त्वचा के लिए तो नुकसानदायक हैं ही दमा के मरीजों के लिए भी ये काफी खतरनाक होते हैं। पोदार इंटरनेशनल स्कूल अहमदाबाद की सुदिति पंत तथा आर्मी स्कूल रखमुट्ठी,जम्मू की अभिषी गुप्ता ने कहा कि हल्दी, रोली तथा चंदन आदि से हम बहुत ही कम कीमत पर घर में प्राकृतिक रंगों को तैयार कर सकते हैं। राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल चौसाला,अल्मोड़ा की पिंकी पांडे तथा राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल हरमनी,चमोली की स्मिता कुंवर ने कहा कि होली में हम मिठाई व गुजिया से भी एक दूसरे का स्वागत कर सकते हैं। राजकीय जूनियर हाईस्कूल जैनोली की तनीषा आर्या ने कहा कि एक बार हम कैमीकल मिले रंग खरीदते हैं। उसके बाद कैमीकल मिले रंगों से हुई बीमारी के उपचार के लिए दवा खरीदते हैं। इसलिए जरूरी है कि हम घर पर ही फूल व पत्तियों से रंग तैयार करें। सर्वश्री आदित्य बोरा, आस्था बोरा, अंजली तड़ियाल,अंजलि पांडे, चित्रांशी लोहनी, कार्तिक अग्रवाल, पवन पांडे, भावना पांडे, जिज्ञासा जोशी, देवज्ञा शर्मा, हितैषी तिवारी, अमृत पंत, प्रिया बेलवाल, अनमोल उप्रेती, आयुश जोशी, सुवर्णा जोशी, खुशी मेहरा सहित 38 बच्चों ने परिचर्चा में भाग लेते हुए प्राकृतिक रंग बनाने के अपने-अपने सुझाव दिए।
इस अवसर पर शशि ओझा, ज्ञान प्रकाश पीयूष, मनोहर भंडारी, बलदाऊराम साहू, अशोककुमार नेगी, गीता जोशी, दलीप बोरा, दिनेश रावत, यादव भाई, चंद्रप्रकाश पटसारिया, मीनू जोशी, कृष्ण सैनी, पुरूषोत्तम तिवारी, एस डी तैनगुरिया, केशवदत्त जोशी, महेश जोशी, महावीर रवांल्टा, देवीप्रसाद पांडेय, आलोक कुमार, नवीन सोराड़ी आदि उपस्थित थे। सभी का आभार व्यक्त करते हुए सेवानिवृत्त आयकर आयुक्त तथा बालप्रहरी के संरक्षक श्यामपलट पांडेय ने कहा कि बच्चों द्वारा प्रस्तुत प्राकृतिक रंगों की जानकारी हम बड़े लोगों के लिए भी उपयोगी थी। उन्होंने कहा कि अपनी सुरक्षा के लिए हमें प्राकृतिक रंगों का उपयोग करना चाहिए।

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