July 30, 2021

शक्ति न्यूज अल्मोड़ा |

1918 से प्रकाशित शक्ति अखबार का डिजीटल प्लेटफार्म

जानिये:— दारमा घाटी की दानवीर जसुली बूढ़ी

1 min read

पंचाचुली के हिम ग्लेशियर से निकलने वाली नदी न्यूलामेती पार करने पर शौकों का देवस्थल दांतू पहुंचा जाता है। जो​ कि दर्मा—दांतो गजला नाम से जाना जाता है। इस पवित्र माटी में च्यर्माहुआ, राजा सुनपति सौका, राजुली सौक्याणी, कीती फौजदार, जसूली बूढ़ी, विजय सिंह सीपाल​, तिका नागन्याल, तथा जयन्त सिंह जैसे महान सौका विभूतियों ने जन्म लिया इसी थाती में वैदिक काल से सौका संस्कृति सम्बंधी विभिन्न संस्कारों के गीत गाथा पुराने जैसे महान ग्रंथों की रचना दारमी बोली में हुआ उन रचनाओं के तथा गाथाओं के धरातल में सौका का अस्तित्व टिका हुआ है। पुराने जमाने में यह परम्परा अपनी चरम सीमा तक पहुंच चुकी थी कि निसंतान माता—पिता अपने धन दौलत को गहन रात्रि में भयावह बीहड़ स्थानों में गड्ढ़ा बनाकर दबाया करते थे तथा कहते थे कि इस धन दौलत का उपयोग करने वाला व्यक्ति संतान के सुख से वंचित रहेगा।
लगभग 250 वर्ष पूर्व इसी धरती में महान दानवीर जसुली बूढ़ी सौक्याणी का नाम दारमा जौहार, व्यास, चौंदास, कुमाऊं , नेपाल, तथा तिब्बत ​तक छाया हुआ था। जसुली बूढ़ी जहां एक ओर धन धान्य से सम्पन्न थी वहीं दूसरी ओर पति
और संतान के सुख से वंचित होने पर धनवान सौक्याणीं की दृष्टि अपने सौंका समुदाय के असहाय तथा संकट ग्रस्त भेड़ बकरियों के साथ दूर—दूर तक नेपाल तिब्बत तथा गढ़वाल कुमाऊं क्षेत्रों में व्यापार हेतु भ्रमण में गए व्यापारियों की ओर गया।
जसुली सौक्याणी ने युगों से चली आ रही अन्ध विश्वास पूर्ण परम्परा को तोड़कर दानवीर महिला ने सौका समुदाय में एक प्रेरणा दायक परिपाटी का श्रृजन कर जौहार, दारमा, व्यास, चौंदास तथा नेपाल
तक व्यापारिक एवम पैदल मार्गों में असख्य धर्मशाला बनवा दिए। समस्त पड़ावो तथा हाट बाजार में 4 से 12 कमरों तक धर्मशालाओं का निर्माण कर कीर्तिमान स्थापित किया। तब पड़ाव 8 से 10 मील तक का माना जाता था कुमाऊंनी गढ़वाली तथा कैलाश यात्री गण सौक्याणी के नाम पर गौरव अनुभव करते है सौका समुदाय ही नहीं वरन् उत्तराखण्ड वासी आज भी सौक्याणी का नाम सुनते ही गौरवन्वित महसूस करते है। सौक्याणी की धर्मशालायें आज भी यत्र तत्र सर्वत्र पैदल एवं मोटर मार्गों में किसी न किसी रुप में विद्यमान है।
कालांतर में सौक्याणी एवम् शौको की गरिमा की सुरक्षा के लिए स्व0 पाना पधान ने भोटिया पड़ाव को धर्मशाला से जोड़कर पट्टी चौदास के सौको की ओर से एक भवन का निर्माण किया। अतीत में दारमा पूर्वजों की धरोहर भोटिया पड़ाव तथा धर्मशालाओं की देख रेख दारमा समाज सेवा संघ के हाथों सौंपा गया था।

अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर आर जी नौटियाल का संदेश

Copyright © शक्ति न्यूज़ | Newsphere by AF themes.

Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home/shaktialmora/public_html/wp-includes/functions.php on line 4757