October 10, 2021

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जानिये— राजकीय इन्टर कालेज अल्मोड़े का इतिहास

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गंगोलीहाट ( पिथौरागढ़ ) के जजूट गाँव के पंडित जयदेव पन्त का परिवार अल्मोड़ा नगर के त्यूनरा मुहल्ले में बस गया था। पंडित जयदेव पन्त जी प्रसिद्ध वैद्य थे । इनके पुत्र का नाम था पंडित बुद्धि बल्लभ पन्त। ये कुशाग्र बुद्धि के थे । इनके जन्म के कुछ वर्षों के बाद अंग्रेजों के संरक्षण में आधुनिक शिक्षा के प्रचार प्रसार हेतु ईसाई मिशनरियों ने अल्मोड़ा में मिशन स्कूल की स्थापना की। यह उत्तराखंड में आधुनिक शिक्षा पद्धति पर आधारित पहला स्कूल था। वर्तमान में यह रामजे इन्टर कालेज के नाम से प्रसिद्ध है। इस स्कूल में छ: वर्ष पढ़ने के बाद ये इसी स्कूल में अध्यापक नियुक्त कर दिए गए। इनको अंग्रेजों ने राजस्व विभाग में भी काम दिया।वहाँ भी इन्होंने उत्कृष्ट कार्य किया और प्रशंसा प्राप्त की। एक निबंध प्रतियोगिता में जिसमें अंग्रेजों ने भी भाग लिया था उसमें प्रथम आने पर इनको कमिश्नर रैमजे ने 50 रुपये पुरस्कार दिया। इनको 1869 में मुन्सरिम के पद पर पदोन्नत कर दिया गया।
ये अच्छे चिन्तक भी थे। ये प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने कुमाऊँ में जागृति लाने का काम किया। तत्कालीन कुमाऊँ में टिहरी रियासत को छोड़कर गढ़वाल का शेष भाग भी शामिल था। कुमाऊँ में अंग्रेजों ने 1857 में शिक्षा विभाग की स्थापना की। इस विभाग का अधिकारी अंग्रेज सैनिक अधिकारी को बनाया जाता था।
1871 में पंडित बुद्धि बल्लभ पन्त जी की योग्यता को देखते हुए इन्हें कुमाऊँ मंडल का विद्यालय निरीक्षक बनाया गया । ये राष्ट्रभक्त भी थे। इस कारण इनको ‘ राय साहब ‘ की उपाधि नहीं दी गई। इन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत काम किया। कुमाऊँ गढ़वाल के इतिहास और भूगोल की पुस्तकें लिखवाई तथा खुद भी लिखी। शिक्षा विभाग का विधिवत् गठन किया। अध्यापकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की। इनके पद त्यागते समय कुमाऊँ में एक कालेज, तीन हाईस्कूल, सत्रह मिडिल स्कूल तथा दो सौ चार प्राथमिक विद्यालय हो चुके थे।
इन्होंने तत्कालीन अल्मोड़ा के प्रबुद्ध जनों को इकट्ठा कर 1870 में अल्मोड़ा में ‘डिबेटिंग क्लब की स्थापना की।बाद में 1903 में हैप्पी क्लब, 1909 में सोशियल क्लब तथा 1916 में कुमाऊँ परिषद की स्थापना में भी इनकी प्रेरणा रही।
इन्होंने आज से 145 वर्ष पूर्व अल्मोड़ा में एक प्रिटिंग प्रेस की स्थापना की और ‘अल्मोड़ा अखबार ‘ नामक हिन्दी अखबार का प्रकाशन किया। यह अखबार भारतवर्ष का दूसरा और उत्तर प्रदेश का पहला साप्ताहिक हिंदी अखबार था।
उनदिनों अल्मोड़ा में माध्यमिक शिक्षा का एक ही विद्यालय था।मिशनरियों द्वारा संचालित रामजे कालेज में प्रवेश में कोई प्रतिबंध नहीं था लेकिन प्रत्येक विद्यार्थी के लिए बाइबिल का अध्ययन अनिवार्य था चाहे वह किसी धर्म का हो। सन् 1888 में नगर के एक विद्यार्थी को ईसाई बनाने का प्रयास किया गया। इससे नगर तथा क्षेत्रवासियों। की भावना आहत हुई। एक ही विद्यालय का एकाधिकार समाप्त करने की भावना जागृत हुई। पंडित बुद्धि बल्लभ पन्त जी ने हिन्दू हाईस्कूल खोलने की योजना बनाई। क्षेत्र वासियों के सहयोग और समर्थन से पन्त जी 1889 में हाईस्कूल स्थापित करने में सफल रहे। उन्होंने उस समय स्वयं 3400 रुपये विद्यालय की स्थापना के लिए दिये। उस समय के हिसाब से यह बहुत बड़ी धनराशि थी। तत्कालीन लेफ्टिनेन्ट गवर्नर ने उस विद्यालय का उद्घाटन किया। सन् 1921 से यह राजकीय इन्टर कालेज ‘अल्मोड़ा के नाम से प्रसिद्ध है।
बुद्धि बल्लभ पन्त सामाजिक तथा रचनात्मक कार्यों में सदा अॻणी रहे। सन् 1870 में इन्होंने डिबेटिंग क्लब की ओर से संस्कृत विद्यालय की स्थापना की। उत्तराखंड में आधुनिक शिक्षा की नींव डालने का श्रेय पंडित बुद्धि बल्लभ पन्त जी को ही जाता है।
नैनीताल में रामजे अस्पताल, कास्थवेस्ट हॅास्पिटल की स्थापना में भी इनका योगदान रहा। इस प्रकार के महापुरुष को हमारा समाज भूल गया। हमने उत्तराखंड जिस भावना की पूर्ति के लिए बनाया था वह पूरा होते हुए नहीं दिख रही है। यदि राजकीय इन्टर कालेज ‘अल्मोड़ा का नाम पंडित बुद्धि बल्लभ पन्त जी के नाम से रख दिया जाता तो अच्छा होता। लोगों को अपनी विरासत की जानकारी रहती तथा अन्य लोगों को भी अच्छे कार्य करने की प्रेरणा मिलती । यदि सभी लोग मिलकर इस आवाज को उठायेंगे तो सम्भव है सरकार भी मान जाय अन्यथा राजनीति कुछ और ही खेल खेलेगी।
प्रस्तुति — प्रकाश चन्द्र पंत
संपादक ‘अल्मोड़ा टाइम्स’
अल्मोड़ा

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