October 10, 2021

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जानिये गुमनाम कुमाऊॅनी साहित्यकार कौन थे

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वैसे तो कुमाऊॅं में अनेक लेखक, साहित्यकार, पत्रकार कवि हुवे है। जिनमें स्वर्गीय कवि सुमित्रानन्दन पंत, नाट्यकार गोविंद बल्लभ पंत, उपन्यास कार इलाचन्द्र जोशी, पत्रकार बद्रीदत्त पाण्डे, राम सिंह धौनी, मनोहर श्याम जोशी जैसे विख्यात व्यक्तियों के स्मरण तो सब करते है एक ऐसे प्रवासी लेखक जिन्होंनेे हिंदी जगत की 50 से अधिक रचनायें समर्पित की किंतु साहित्य के इतिहास में उनका उल्लेख नहीं हुआ।
उनका नाम था दुर्गादत्त त्रिपाठी जिन्होंने 1905 में जन्म लेकर 1979 में इहलीला समाप्त की। उन्होंने चंदौसी मुरादाबाद में निवास करते हुए महाकाव्य, खण्ड काव्य, उपन्यास कहानियां, काव्यसंग्रह सभी लिखे, इनकी रचनाओं में केवल 5 प्र​काशित है और लगभग 50 रचनायें प्रकाशन की प्रतीक्षा रत है। दुर्गादत्त त्रिपाठी ने निम्न रचनायें लिखी महाकाव्य — स्वर्ग, निर्मलता का श्राप, शंकराचार्य्, गांधी संवत्सर, खण्ड काव्य— शकुंतला, सन्धि और विच्छेद काव्य संग्रह, अनुसूतियां, आरोहा, आसव, अनुजा, सौम्या, कृतंभरा, भूयसी, मधुलिपि, पत्रांक, रक्तलिपि, वृन्दा, भामिका, प्रर्यति, उर्वरा, त्वदीया, कुल्पदुहा, देशिका आदि।
उपन्यास, अमर सत्य, उत्तरादयी बटवारा नहीं होता आदि। कहानी संग्रह— क्रमागत, जीने का सहारा, विश्वास का लक्ष्य, उतरता हुआ मद, धुकधुकी आदि। त्रिपाठी जी रचनात्मक साहित्य लिखने के साथ ही कुशल समीक्षक भी थे मुरादाबाद में उनके नाम से स्थापित साहित्य संस्थान है।
त्रिपाठी जी न केवल सफल साहित्यकार, कुशल समीक्षक प्रकाण्ड पण्डित थे बल्कि वे काव्य गुरु और संवेदनशील मनुष्य भी थे उन्होंने पत्रकारिता से अपना जीवन प्रारम्भ किया तथा दिल्ली से प्रकाशित होने वाले महारथी मासिक पत्र में सहायक बने। 1940 से 1972 के बीच में उनकी पांच रचनायें प्रकाशित हुई जिनमें शकुंतला (खण्डकाव्य) अमरसत्य (उपन्यास) गांधी संवत्सर(महाकाव्य) मंटो मिला था (उपन्यास)तथा ​तीर्थकिला (काव्य संकलन)।

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