January 29, 2022

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प्रेम सत्य बोलने की स्वतंत्रता प्रदान करता हैं- डा. रमेश पाल

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एक मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि अजनबियों के साथ लोग अपने जीवन के बड़े गहरे से गहरे राज, गलतियां व्यक्त कर देते हैं, लेकिन निकट के लोगों से छिपाते हैं। क्योंकि अजनबी न हमारा नाम-धाम जानता है, न हममें उत्सुक है। बस हम कहते है तो इसलिए सुन लेता है कि चलो ठीक है, सफर है, साथ बैठे हैं तो सुन लो। अन्यथा तुम छिपाए रहते हो। मेरे पास बहुत से लोगो के फ़ोन आते है। और वो कई ऐसी बाते, अपनी आदतों के बारे में बताते है जो उन्होने कभी अपने माँ बाप या पत्नी से भी नही कही।
पति हैं, पत्नी हैं, मित्र हैं, पिता हैं, बेटे हैं, एक-दूसरे से बहुत कुछ छिपा रहे हैं। लगभग सभी रिश्ते झूठ की नींव पर खड़े है। बड़े से बड़े मनोवैज्ञानिक मानते है कि यदि सिर्फ़ 1 दिन के लिए यदि सभी आदमी ये प्रण करले की वो सत्य बोलेगे तो हमारे 90 प्रतिशत से भी ज्यादा के रिश्ते बिगड़ जायेगे। जो रिश्ते बचेगे वो केवल प्रेम के रिश्ते होंगे। क्यों कि हम जब किसी से झूठ बोलते है। रिस्तो में पाखंड डाल देते है उसी में प्रेम मर जाता है, क्योंकि प्रेम किसी तरह की गुप्तता नहीं चाहता। प्रेम चाहता है प्रकटता, प्रेम चाहता है सहजता, प्रेम चाहता है खुला आकाश। इसलिए जिससे हम सत्य नही कह सकते, जिसके सामने हम सत्य कहने से डरते है उससे कभी भी हमारा प्रेम नही हो सकता।
इसलिए एक बात को समझना जरूरी है कि यदि कोई भी मनुष्य चाहे वह हमारा रिस्तेदार हो या हमारा सबऑर्डिनेट यदि वह भय या किसी लालच में हमसे प्यार होने का दावा करता है तो उसका प्रेम का दावा झूठा है। प्रेम तो परम सुख है जो करता है उसके लिए भी ओर जिससे किया जाता है उसके लिए भी।

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