November 13, 2021

शक्ति न्यूज अल्मोड़ा |

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मनुष्य अपनी गलत आदतों के लिए भी तर्क ढूंढ ही लेता है

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मनुष्य हर चीज के लिए तर्क ढूंढने में बड़ा चतुर है। हम अपने जीवन मे उदासी के लिए भी यदि तर्क दे सके तो हमे बड़ी सहूलियत मिलती है और सबसे बड़ी उदासी तो तब होती है, जब उदास होने का कोई कारण भी नहीं होता। जब अपनी उदासी के लिए तर्क भी नहीं जुटा सकते। तब हम बिलकुल असहाय हो जाते हो। क्यों कि जिंदगी भर हम उदास ही उदास रहे, तो उदास होना हमारी आदत हो जाती है। ऐसा बहुत बार हो जाता है कि क्रोधी आदमी को क्रोध की आदत हो जाती। फिर क्रोध का कारण न हो, तो भी उसको तो क्रोध करना ही है। वह तो बिना क्रोध किए नहीं रह सकता। वह तो कोई न कोई उपाय खोजेगा।हम बाहर क्रोध के लिए उपाय खोजते रहते हैं लेकिन क्रोध तो हमारे भीतर है लेकिन यदि क्रोध अकारण किया, तो पागल समझेगे इसलिए कोई कारण बाहर खोज लेना होता है। हम भी पीछे लौट कर सोचते है, तो पाते है: कारण पर्याप्त नहीं था–इतने क्रोध के लिए पर्याप्त नहीं था। क्रोध कुछ ज्यादा ही कर दिया।हम पीछे पछताते है कि बात बड़ी छोटी थी!इसका कुल कारण है, आदत…अगर हम रोज-रोज क्रोध करते रहे है, तो हमे रोज किसी की क्रोध करने के लिए तलाश करनी पड़ेगी। क्रोध का भी addiction हो जाता है। ऐसे ही उदास होने की आदत हो जाती है। और 90 प्रतिशत लोगो के जीवन मे उदासी उनके जीवन जीने के लिए प्रेरक मालूम पड़ती है। मैं कहता हूँ कि यदि इन 90 प्रतिशत लोगो के जीवन से यदि सब उपद्रव समाप्त कर दिए जाएं कोई उदासी का कारण न छोड़ा जाय तो शायद ये सभी के सभी आत्म हत्या भी कर ले। क्यों कि दुखी होने की भी आदमी को आदत पड़ जाती है। फिर उस दुख को ही वह अपनी तकदीर समझ कर जीता चला जाता है। उसे बड़ा डर इस बात का लगता है कि जीवन मे कुछ और संभावना का तो उसे कुछ भी पता नही कही ये दुख, उदासी भी जीवन से निकल गयी तो उसका क्या होगा।

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