October 12, 2021

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कोरोना महामारी के दौर में अहम हुआ मई दिवस, लॉक डाउन ने खड़े किए नए सवाल, दुनिया के मेहनतकश मजदूरों के भविष्य पर काली छाया

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जगदीश जोशी वरिष्ठ पत्रकार नैनीताल: अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस यानि मई दिवस की शुरुआत अमेरिका में 1 मई 1886 को हुई थी। इसमें मुख्य रूप से मजदूरों के लिए काम का समय अधिकतम 8 घंटे रखे जाने की मांग की गई थी। भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत अंग्रेजों के शासनकाल से हो गई थी। आज के चेन्नई में 1 मई 1923 को पहला मई दिवस मनाया गया। इधर कोरोना महामारी के चलते इस बार मई दिवस की महत्ता कुछ विशेष हो गई है । लॉकडाउन के बीच करोड़ो मजदूरों पर बेरोजगारी की तलवार लटक रही है। रोजगार पर संकट के बीच बन रही नई आर्थिक नीतियों में काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 करने की कोशिश हो रही है। देश व दुनिया के करोड़ों मजदूरों के भविष्य पर लगे प्रश्नों का कोई जवाब देने की स्थिति में नहीं है। उत्तराखंड जैसे रोज़गार विहीन पहाड़ी राज्य में लॉक डाउन के बाद रिवर्स पलायन हुआ है। इस चुनौती का सामना करने के लिए सरकार ने कोशिश शुरू की है लेकिन इसका स्पष्ट रोड मैप अभी सामने नहीं आया है। कोरोना से जंग में कामगारों के एक वर्ग अपनी जान जोखिम में डालकर दायित्व निर्वहन करने को मजबूर हैं। इनमें डॉक्‍टर, नर्स, पैरामेडिकल स्‍टाफ, सफाई कर्मचारी, ट्रांसपोर्ट में लगे चालक परिचालक और पुलिस व प्रशासन के जुड़े अधिकारी कर्मचारी शामिल हैं। मीडिया से जुड़े लोग भी खतरे की परवाह किए बगैर अपने काम को अंजाम दे रहे हैं। उनकी सुरक्षा की गारंटी का सवाल है। मई दिवस 2020 पर लोंगों ने अपनी राय साझा की है। कोरोना के लॉक डाउन से बढ़ी दुस्वारियाँ:- उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व अध्यक्ष नैनीताल के विधायक रहे डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि मई दिवस देश दुनियां में मजदूर किसान श्रमिक वर्ग के अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है। मजदूरों ने बड़ी शहादत के बाद अपने हक हकूक हासिल किए हैं। कोरोना संकट में लॉक डाउन ने इस वर्ग की चिंता व दुस्वारियां बढ़ा दी हैं। उत्तराखंड में भी सरकार को मजदूर, किसान, कामगारों के सम्मान पूर्वक जीवन जीने के लिए इंतजाम करना होगा। ताकि मेहनतकश मजदूर किसान के सपनों का उत्तराखंड बन सके।

डा. एनएस जंतवाल

कर्मचारियों के हितों के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प:-उत्तराखंड जनरल ओबीसी कर्मचारी एसोशिएशन नैनीताल के प्रवक्ता जगमोहन सिंह रौतेला कहते हैं कि मई दिवस कर्मचारी हितों के संघर्ष में नई ऊर्जा प्रदान करता रहा है। वर्तमान दौर में संगठित व अंसगठित कर्मचारियों के भविष्य पर संकट की छाया है। ऐसे में एक बार कर्मचारी हितों के संघर्ष के लिए फिर से संकल्प लेना होगा। हालांकि कर्तव्य के प्रति भी समर्पण के भाव बनाए रखने होंगे

जगमोहन रौतेला

कोरेना व प्राकृतिक आपदा से त्रस्त मजदूर किसान:-उत्तराखंड देवभूमि क्रांतिकारी मोर्चा के अध्यक्ष केएल आर्या ने कहा कि कोरोना वायरस के बीच मई दिवस मजदूर किसान के लिए बुरा दौर लेकर आया है। पहले रोजगार खत्म होने की स्थिति बन रही है वहीं अतिवृष्टि से किसान भी बदहाल हैं। ऐसे में सरकार को प्रभावितों को मदद देने के लिए आगे आना होगा। संगठन के माध्यम से इसके लिए पहल जारी रहेगी।

केएल आर्या

कोरोना संकट से निपट रहे कर्मियों का रहे विशेष ख्याल:- राजकीय वाहन चालक संघ नैनीताल के कोषाध्यक्ष भगवत सिंह बोरा का कहना है कि मई दिवस पर कर्मचारी वर्ग लंबित मांगों को लेकर नई रणनीति बनाते आए हैं लेकिन इस बार के हालात कुछ अलग हैं। डॉक्टर व स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ ही पुलिस व पालिका कर्मचारी अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। कोरोना वॉरियर्स की इस टीम में सरकारी व गैर सरकारी वाहन चालक भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। मजदूर दिवस के अवसर पर सरकार व प्रशासन से कर्मचारियों के इस वर्ग का पूरा ध्यान रखने की अपेक्षा है जोकि संकट की घड़ी में पूरे समर्पण के साथ व्यवस्था बनाने में दिन रात सहयोग कर रहे हैं।

भगवत सिंह बोरा
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