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राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक है नंदा देवी परिसर अल्मोड़ा

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भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में कुमांऊ की अद्धितीय भूमिका रही है। राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक नंदा देवी का प्रांगण रहा है। भारत में राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना यद्पि 1885 मे हो चुकी थी इसका व्यापक असर इस क्षेत्र में भी पड़ा और अल्मोड़ा नगर में राष्ट्रीय आंदोलन की हलचल आरंभ होने लगी। लेकिन अल्मोड़ा में कांग्रेस की विधिवत स्थापना लगभग 1912 में हुई। 1913 से ही नंदा देवी का परिसर राष्ट्रीय आंदोलन का स्थानीय प्रमुख स्थल के रूप में प्रयोग किया जाने लगा।
सन् 1913 में स्वामी सत्यदेव के अल्मोड़ा आने पर नंदा देवी परिसर नवयुवकों का केंद्र बिंदु ही हो गया। उनके द्वारा नवयुवकों को दिये गये राष्ट्रीय प्रेरणा के संदेश से इस नगर को काफी प्रभावित किया। स्वामी सत्यदेव भी यहां काफी वर्षो तक आते जाते रहे। नंदा देवी परिसर को ही अपनी ओजस्वी संदेश का स्थल बनाकर नवयुवकों को राष्ट्रीय विचारधारा की ओर मोड़ दिया। उन्हीं के प्रयास से लाला लाजपत राय का भी आगमन हुवा। जिन्होंने नंदा देवी परिसर से ही यहां की जनता को राष्ट्रीय आंदोलन का संदेश दिया।
1921 में पंडित बद्रीदत्त पांडे के नेतृत्व में कुली आंदोलन प्रारंभ हुवा और उन्होंने बेगार प्रथा को समाप्त कराया। उसी वर्ष पंडित मोतीलाल नेहरू ने नंदा देवी परिसर से ही विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार करने हेतु यहां के लोगों को प्रेरित किया जिसका परिणाम यहां पर विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के रूप मे सामने आया तथा विदेशी शासन के नियमों को न मानने की घोषणा की थी।
सभवत: सन् 1930 में ही नंदा देवी के ऐतिहासिक प्रांगण में पहली बार कांगेस का ध्वज स्थापित किया गया जो 1942 में एक विदेशी खिदमतगार ने कुलहाडी से काटा परंतु उसे यह मालूम नहीं था कि यह ध्वज स्तंभ की नींव इतनी गहरी गाढी जा चुकी है कि मामूली लठ्ठे को काटकर इसे समाप्त नहीं किया जा सकता। कुछ ही वर्षो के बाद उस स्थान पर लोहे के मोटे नलों पर यह ध्वज स्तंभ फिर अपने स्थान पर स्थापित कर दिया गया। एक समय में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी इसी ध्वज स्तंभ पर ध्वजारोहण भी किया। यह ऐतिहासिक नंदा देवी परिसर का ध्वज कुमांऊ के जन—जन को राष्ट्रीय आंदोलन की प्रेरणा देता रहा हैं। 1930 में अल्मोड़ा नगर पालिका में राष्ट्रीय ध्वज फहराने का सूत्रपात्र इसी परिसर से प्रारंभ् हुवा।
1935 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत का सार्व​जनिक अभिनंदन भी इसी प्रांगण में हुवा। सन् 1921 से आजादी तक नंदा देवी प्रांगण में न केवल कुमांऊ के वरन् भारत के चोटी के राष्ट्रीय नेताओं की ओजस्वी वाणी को इसी परिसर से सुना गया तथा इसी से प्ररेणा लेकर यहां के लोगों ने बढ़—चढ़कर अपना तन मन धन न्योछावर किया।
सन् 1947 में प्रथम स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को इसी ध्वज स्तंभ पर द्धारिका प्रसाद अग्रवाल ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
स्वतंत्रता के बाद अनेक राष्ट्रीय नेता इस ऐतिहासिक नंदा देवी प्रांगण से जनता को संबोधित कर चुके हैं। इस नंदा देवी परिसर का आज भी उतना ही महत्व है जितना की स्वाधीनता संग्राम के दौर में था।

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