October 12, 2021

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‘स्वाधीनता के 75 वर्षों में ललित कलाओं की भूमिका’ ऑन द स्पॉट चित्र निर्माण कार्यशाला एवं प्रतियोगिता का आयोजन

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अल्मोड़ा।स्वाधीनता के 75 वर्षों में ललित कलाओं की भूमिका विषय पर दृश्य कला संकाय एवं चित्रकला विभाग सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ‘आन द स्पाट चित्रकला कार्यशाला’ में आज दूसरे दिन प्रातः 10:00 बजे से प्रतिभागी कलाकारों ने चित्रों का निर्माण आरंभ किया कार्यशाला में पूर्व से पंजीकृत कलाकारों के अतिरिक्त भारी संख्या में आये युवा कलाकारों का कार्यशाला में प्रतिभाग करने हेतु उत्साह देखकर मुख्य संरक्षक माननीय कुलपति प्रोफेसर एन.एस.भंडारी जी ने युवा प्रतिभा विकास एवं छात्र हित में संस्कार भारती क्षेत्र प्रमुख श्री देवेंद्र सिंह रावत, महामंत्री श्री पंकज अग्रवाल, सह कोषाध्यक्ष श्री अभिषेक पाठक, प्रांतीय चित्रकला संयोजक डॉ गिरीश चंद्र शर्मा तथा कार्यक्रम संयोंजिका – प्रोफेसर सोनू द्विवेदी ‘शिवानी’ की संयुक्त सहमति से ऑन द स्पॉट पंजीकरण करवाकर कलाकारों को कार्यशाला मे प्रतिभाग करने का अवसर दिया गया।


आज प्रोफेसर विजयारानी ढौढियाल (संकायाध्यक्ष शिक्षा संकाय) , प्रोफेसर के.सी. जोशी (संकायाध्यक्ष वाणिज्य संकाय एवं अधिष्ठाता वित्त) एवं प्रोफेसर शेखर चंद्र जोशी (शैक्षिक अधिष्ठाता) सहित अनेको प्रबुद्धजन युवा कलाकारों के चित्रों का अवलोकन करने के लिए कार्यशाला में उपस्थित रहे। प्रो. ढौढियाल ने कहा कि दृश्य कला संकाय और चित्रकला विभाग युवा कलाकारों की सृजनात्मक शक्ति एवं इनकी बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने के लिए निरंतर सराहनीय प्रयास कर रहा हैं इस तरह की कार्यशाला के माध्यम से विधार्थी एक – दूसरे से बहुत कुछ सीखते हैं।
कार्यक्रम संयोजिका प्रो. सोनू द्विवेदी शिवानी (संकायाध्यक्ष दृश्यकला एवं विभागाध्यक्ष चित्रकला) ने बताया कि कार्यशाला में कुल 75 कलाकार अमृत महोत्सव 2021 को केंद्र में रखकर प्रस्तावित विषय पर चित्र का निर्माण कर रहे हैं अभी कल भी यह कार्यशाला चलेगी, दर्शक वर्ग के लिए चित्रों को बनते हुए देखना अपने आप में एक अलग सुखद अनुभूति होती है इसलिए कार्यशाला में बनते हुए चित्रों को देखने के लिए सभी को आना ही चाहिए इससे कलाकारों का उत्साहवर्धन होता है।
प्रो. के.सी.जोशी अधिष्ठाता वित्त/बजट ने कहा कि आज युवा वर्ग में प्रतिभा की कमी नहीं है उनको दिशा दी जाए तो वो गूढ़ से गूढ़ विषय को भी समझ कर कला मे प्रस्तुत कर सकते हैं कार्यशाला के प्रतिभागी कलाकार बहुत ही सुंदर और विषय को विवेचित करने वाले चित्रों का निर्माण कर रहे हैं पूरा विश्वास है कि ये चित्र ‘अमृत महोत्सव’ की सार्थकता सिद्ध करेंगे।
प्रो. शेखर चन्द्र जोशी (अधिष्ठाता शैक्षिक) ने प्रतिभागी कलाकारों के कार्यों का गहन अवलोकन किया एवं उन्हे विषय गत् विचार की बारिकियां समझाई ।
आज अतिथि रूप मे उपस्थित रविशंकर गुसाई (कुमाऊँ मंडल राजकीय शिक्षक संघ के संयुक्त मंत्री ) ने प्रदर्शनी कक्ष मे लगे चित्रों का अवलोकन किया साथ ही उन्होंने विभाग में कार्य कर रहे चित्रकारों
के प्रतिभा की प्रशंसा की
उन्होंने कहा कि युवा चित्रकार देश व समाज के लिए चिंतनशील हो तो वह अपने देश के विकास का ध्वजवाहक होता है कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि यहां के कलाकार समसामयिक विषयों के साथ-साथ ऐतिहासिक विरासत से विषयो को उठाकर समकालीन चित्रण तकनीक मे उसका प्रयोग कर रहे हैं उन्होंने सभी कलाकारों को हार्दिक बधाई दी ।
डाॅ. ललित जोशी ‘योगी’ (विश्वविद्यालय मीडिया प्रभारी) ने कलाकारों के प्रयास को सराहा
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या मे कलाकारों प्रतिभागिता विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है।
कार्यशाला का कार्यभार कौशल कुमार, चन्दन आर्या, तथा रमेश मौर्य (सह संयोजक मंडल) एवं तकनीकी सहायक सन्तोष सिंह मेर कार्यालय सहयोगी पूरन सिंह एवं जीवन चन्द्र जोशी ने संभाला।
इस अवसर पर कु. बिमला राना, सागर भैसोड़ा (पूर्व शोध छात्र) प्रतिभागी कलाकार – योगेश डसीला, धीरज भट्ट, कु. कंचन कृष्णा, श्री पंकज कु. जायसवाल, उत्तम सरदार, तरूण कुमार , नवीन चन्द्र, कु. सुनीता तिवारी, हिमांशु आर्या, महेंद्र, दक्षिता साह, निशु नेगी, मुकेश चन्दा, राहुल जोशी, रश्मि थापा, तनुजा, हर्षिता सहित दृश्यकला संकाय एवं चित्रकला विभाग के सभी छात्र /छात्राऐं उपस्थित रहें विद्यार्थियों ने कहा कि चित्र निर्माण कार्यशाला से हमे बहुत कुछ सीखने और समझने को मिल रहा है हम सभी साथ कार्य कर पा रहे है ऐसे आयोजन विभाग में होने ही चाहिए।

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