January 27, 2022

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परमसंत सोमवारी बाबा भाग (2):— इनके अदभुत चमत्कार……….

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परमसंत सोमवारी बाबा भाग (2):— इनके अदभुत चमत्कार……….
इनके अदभुत चमत्कार के सम्बंध में अनेकों कथायें सुनने में आई हैं—
एक बार सायंकाल को जब ये मन्दिर में शिवजी की आरती उतार रहे थे— तो एकाएक खिलखिलाकर हंस पड़े। जब भक्तों ने आग्रह पूर्वक इसका कारण पूछा तो कहने लगे कि बद्रीनाथ में पंडा जब आरती कर रहा था और घंट बजा रहा था तो एकाएक उसका ध्यान जब दूसरी ओर आकर्षित हुआ तो आरती का थाल हाथ से गिर पड़ा। भक्तों ने जब पूरी छानबीन की तो वह घटना अक्षरश: सत्य निकली।
एक बार इनके आश्रम में एक भिखारी नित्य प्रति योगीश्वर से मक्खन और मलाई पाकर चला जाता था और किसी से कुछ बोलता चालता नहीं था। जब भक्तों से नहीं रहा गया तो उन्होंने उसका हाल पूछना चाहा। योगीश्वर जी हंस पड़े पीछे ज्ञात हुआ कि वह व्यक्ति महाभारत का वीर अमर अश्वस्थामा था और पूछने के पश्चात वह फिर कभी आश्रम में आता हुआ दृष्टिगोचर नहीं हुआ।
एक बार एक दूध वाला अपनी स्त्री की सहमति के विरुद्ध तथा स्त्री को भला बुरा सुनाकर तथा अपने बच्चों का हिस्सा मारकर समस्त दूध योगीश्वर की सेवा में लाया। योगीश्वर ने तत्काल उसे फटकार बतलाई कि वह स्त्री की सहमति के विरुद्ध तथा बच्चों का हिस्सा मारकर सेवा भाव प्रकट करने आया है और यह कह कर उसके सामने ही तमाम दूध गंगा में प्रवाहित कर दिया। उससे पूछने पर सब सत्य साबित हुई और वह मनुष्य अपने किये पर पश्चाताप करने लगा।
नैनीताल निवासी एक सज्जन नाम लिखना ठीक नहीं समझा जो बहुत शराबी थे और शराब में अपना कारोबार बिगाड़ चुके, महात्मा के आशीर्वाद से पुन: चैतन्य हो गये और जब तक योगीश्वर की दया रही ये शराब से सदा दूर रहे और उनके भाव भक्तिपूर्ण हो गये। पुन: कई वर्षों बाद कुसंगति से जब उन्हें पुरानी लत सवार हुई तो तत्काल उनका देहांत भी हो गया।
एक क्षय के मरीज काशीपुर निवासी जब योगीश्वर का आशीर्वाद का प्रसाद पा चुके तो वह थोड़े दिनों बाद बिना किसी औषधि अनुपान के पूर्ण स्वस्थ्य हो गये और अभी तक निर्विघ्न अपना कारोबार करते हैं।
एक सरकारी उच्च पदाधिकारी महोदय किसी सरकारी कार्य की लपेट में निरपराध फंस गये लेकिन महात्मा जी की दया व आशीर्वाद से वे साफ बच गये और उन्होंने तीन दिन तक अपनी ओर से आश्रम में भण्डारा किया।
इनके आश्रम में बहुत से साधु—संत तथा फकीर रहते थे, उनमें नाथ, बाबा जी भी एक थे। दैव बसात एक दिन उनकी नियत ने पल्टा खाया और वे आश्रम से कुद रुपये लेकर चम्पत हो गये। भक्तों तथा अन्य आगन्तुकों को नाथ बाबा के इस कार्य पर बड़ा आश्चर्य हुआ। योगीश्वर जी ने मययाल के एक ठाकुर महोदय से कहा देखो जी हल्द्वानी में किसी पीपल के पेड़ के पास उनकी तलाश कर लेना बात पूर्णत: सत्य हुई। नाथ बाबाजी पीपल के पेड़ के सामने दर्जी के पास कपड़े सिलाते हुये पकड़ लये गये, और ठाकुर महोदय उन्हें पकड़ कर पद्वबोरी ले जाने लगे। मययाल में पहुंचते ही उन्हें हाजत की जरुरत हुई और बाबा जी मौका पाते पुन: फरार हो गये और ठाकुर महोदय के कुछ कहने से पूर्व ही कह दिया ठीक हुआ वे मययाल से भाग गये। उनको इतना ही लज्जित करना पर्याप्त था न जाने यहां आते ही वे प्राण छोड़ देते। उनका भाग जाना भी योगीश्वर ही की माया पर निर्भर था।

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