September 17, 2021

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Age Relaxation in Govt Jobs In Uttarakhand

व्यक्तित्व— कूर्मांचल के गौरव (ले0 जनरल गजेन्द्र सिंह रावत)

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कैलाश मानसरोवर और पंचाचूली के आगन में बसे कूर्मांचल के पिथौरागढ़ जनपद के एक क्षेत्र बाराबीसी के मुख्य केन्द्र देवलथल में बिग्रेडियर नारायण सिंह रावत के घर जन्मे ले0 जनरल गजेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड में प्रथम बार ले0 जनरल का पद प्राप्त किया और उत्तराखण्ड को नया गौरव प्रदान किया। उन्होंने दिसम्बर 1947 में 115 गढ़वाल राइफल्स में कमीशन प्राप्त किया। तब से देश के सभी सैनिक अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1971 में भारत पाक संघर्ष के समय श्री रावत को उनकी बहादुरी और रणकौशल के कारण सेना का अति विशिष्ट सेवा मेडल दिया गया।
जी0ओ0सी0 नागालैण्ड और मणिपुर के रुप में उनका कार्यकाल अत्यंत उल्लेखनीय रहा उक्त क्षेत्र में शान्ति स्थापित करने एवम् विद्रोही नागाओं की समस्या से निपटने के लिये आपने अदभुत सूझ—बूझ का परिचय दिया तथा उनके इसी सेवा काल में नवम्बर 1975 में महत्वपूर्ण शिलांग समझौता हुआ तथा उक्त क्षेत्र में उनकी उल्लेखनीय सेवाओं को देखते हुए 1976 में उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। जनवरी 1979 में श्री रावत मेजर जनरल बने तथा जुलाई 1979 में उन्होंने सेना ​सचिव का पद संभाला।
उनकी योग्यता के कारण 1981 में उन्हें ले0 जनरल का महत्वपूर्ण पद मिला। इस प्रकार श्री रावत को उत्तराखण्ड का प्रथम ले0 जनरल बनने का श्रेय प्राप्त कर इस अंचल को गौरवान्वित किया। जनरल रावत को स्वतंत्रता के पश्चात् कमीशन प्राप्त करने वाले भारतीय सैनिक अकादमी के प्रथम कमाण्डेन्ट होने का भी श्रेय प्राप्त है। वे जम्मू—कश्मीर राइफल्स और लदाख स्काउटस के कर्नल भी रहे है। शूरवीरता और कुशल सैनिक अधिकारी के गुण उन्हें विरासत में मिले है। उनके पिता ब्रिगेडियर नारायण सिंह ने महाराजा जम्मू कश्मीर की सेवा तथा बाद में भारतीय सेना में पर्याप्त यश प्राप्त किया। जून 1901 में पिथौरागढ़ के देवस्थल ग्राम में जन्मे इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए की उपाधि प्राप्त करने वाले इस क्षेत्र के प्रथम स्नातकों में रहे है। 1924 में जम्मू और कश्मीर सेना में कमीशन प्राप्त कर चतुर्थ जम्मू कश्मीर इन्फैन्ट्री बटालियन का संचालन करने का भी उन्हें गौरव प्राप्त हुआ तथा महाराजा हरिसिंह के साथ ब्रिटिश वार कैबिनेट में स्टाफ अफसर के रुप में काम किया। वह युवराज कर्ण सिंह के साथ 1948 में संयुक्त राज्य अमेरिका में रहे।
सेना से अवकाश ग्रहण करने के बाद ब्रिगेडियर रावत 1961 तक इण्डियन एयर लाइंस के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर दक्षता पूर्वक काम किया।

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