October 11, 2021

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राष्ट्रीय एकीकरण एवं हिन्दी’ विषय पर हुई गोष्ठी

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अल्मोड़ा। आजादी का अमृत महोत्सव 2021 के तहत हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा द्वारा 21 सितम्बर को अपराह्न 12 बजे से ‘राष्ट्रीय एकीकरण एवं हिन्दी’ विषय पर गोष्ठी का उद्घाटन दृश्यकला संकाय के सभागार में हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि रूप में महात्मा गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी (बिहार) के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा, अध्यक्ष रूप में सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा के कुलपति प्रो. एन. एस. भण्डारी, कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. देव सिंह पोखरिया तथा प्रो. दिवा भट्ट, कार्यक्रम के संयोजक प्रो. जगत सिंह बिष्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
संयोजक प्रो जगत सिंह बिष्ट ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्व और भारत में हिंदी की स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि हिंदी को जानने-समझने वालों की संख्या नें निरंतर वृद्धि हो रही है और यह हमारे लिए हर्ष का विषय है। हिंदी के प्रति हमारे हृदय में सम्मान होना चाहिए। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर दिवा भट्ट ने कहा कि राष्ट्रीय एकीकरण के लिए हिंदी को मजबूत बनाना होगा। सम्पूर्ण देश की एक भाषा होनी चाहिए। हिंदी में एक करने की क्षमता है, इसलिए हिंदी को समृद्ध बनाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने ‘चलो तुम्हारा मौन कुरेदें चुपके चुपके’ गीत का गायन किया।
विशिष्ट अतिथि रूप में प्रोफेसर देव सिंह पोखरिया ने कहा कि ‘राष्ट्रीय एकता की मिशाल भाषा होती है।’ हिंदी एकीकरण की ओर बढ़ रही है। कवियों, राजनीतिज्ञों का राष्ट्रीय एकीकरण के लिए बहुत बड़ा योगदान है। हिंदी के लिए हमें सच्चे मन से सेवा करने की जरुरत है। उन्होंने हिंदी के विभिन्न काल कर्मों और हिंदी भाषा के विकास के इतिहास को सविस्तार प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि रूप में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो संजीव शर्मा ने कहा कि आज महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय,अल्मोड़ा के बीच अकादमिक गतिविधियों को लेकर एमओयू हस्ताक्षर कर ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। भविष्य में हम बड़े कार्यक्रमों को आयोजित कराएंगे।
राष्ट्रीय एकीकरण एवं हिंदी को लेकर उन्होंने कहा कि स्वाधीनता के समय हिंदी ने देश को एक करने का काम किया है। हिंदी की सफलता तब है, जब हिंदी भाषा का प्रयोग भौतिक, रसायन जैसे अन्य विभागों में पहुंचे। हिंदी भाषा का प्रयोग कर हम हिंदी को समृद्ध बना सकते हैं। आज हमने हिंदी को बाजारी भाषा बना दिया है। आज हिंदी के साथ अपमान हो रहा है। हिंदी भाषा केवल उत्सवों की भाषा न बन जाए, इसके लिए चिंतन करना होगा। हिंदी लिखने, पढ़ने में हमें कोई हिचक न हो। अध्यक्षता करते हुए सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो नरेंद्र सिंह भंडारी ने गोष्ठी के अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी एक विषय और एक विचार दोनों है। हम अपने इस विचार को आगे बढ़ाने का प्रयास करें। हम हिंदी के विचार को विद्यार्थियों और साथियों में नहीं प्रेषित कर पाए हैं। जिसको आज प्रमुखता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। हमें हिंदी को विचार के रूप में लेकर आगे बढ़ाना होगा। हिंदी को अपने व्यवहार में लाना होगा। उन्होंने कहा कि भारत विद्या को लेकर पुरातन समय से श्रेष्ठ रहा है। हमें भारत विद्या पर चिंतन कर भारत के शास्त्रीय ग्रंथों, वेद, पुराण आदि को बढ़ावा देना होगा। गोष्ठी का संचालन हिंदी विभाग की शिक्षक डॉ. प्रीति आर्या तथा आभार व्यक्त डॉ गीता खोलिया ने किया।
इस अवसर पर डॉ देवेंद्र सिंह बिष्ट (विश्वविद्यालय, विशेष कार्याधिकारी) ,अधिष्ठाता प्रशासन प्रो. प्रवीण सिंह बिष्ट, अधिष्ठाता परीक्षा प्रो जी सी साह अधिष्ठाता शैक्षिक प्रो. शेखर जोशी, अधिष्ठाता वित्त/बजट प्रो. के. सी. जोशी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. इला साह, कुलानुशासक डॉ.मुकेश सामंत, प्रो.जी. सी.साह (अधिष्ठाता परीक्षा), प्रो.विजया रानी ढौडियाल (संकायाध्यक्ष शिक्षा), प्रो ए. के. पंत (संकायाध्यक्ष, विधि), प्रो सोनू द्विवेदी शिवानी (संकायाध्यक्ष, दृश्यकला एवं अध्यक्ष, चित्रकला),प्रो भीमा मनराल (पुस्तकालयाध्यक्ष) , प्रो. अनिल जोशी, डॉ. गीता खोलिया, डॉ तेजपाल सिंह, डॉ. माया गोला, लियाकत अली, डॉ. संजीव आर्या, डॉ धनी आर्या, डॉ मनोज बिष्ट, डॉ भाष्कर चौधरी, डॉ. ललित जोशी, डॉ विभाष मिश्र, डॉ आशा शैली,प्रतिमा, कौशल कुमार, दिनेश पटेल, पूरन मेहता, जीवन जोशी, संतोष मेर आदि शिक्षक, छात्र-छात्राएं और कर्मचारी मौजूद रहे।

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