January 26, 2022

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पांच दिवसीय जेंडर स्टेडीज पर आयोजित वेबिनार के समापन पर वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो संतोष अरोड़ा ने कही ये बात

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अल्मोड़ा— यहां पांच दिवसीय जेंडर स्टेडीज पर आयोजित वेबिनार के समापन हो गया है इस अवसर पर ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली की वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो संतोष अरोड़ा ने कहा कि जेंडर भेदभाव का सबसे अहम कारण महिला स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता रहा है। पुरूषों की तुलना में महिलाओं को जिम्मेदारियों का दबाव व कुपोषण का सबसे अधिक सामना करना पड़ता है। जो ना केवल महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है बल्कि, मानसिक, बौद्धिक एवं संवेगात्मक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
यह बात मंगलवार को सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ एजुकेशन एवं इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज इन एजुकेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय वेबिनार के समापन अवसर पर रुहेलखंड विवि की संदर्भदाता प्रो संतोष अरोड़ा ने कही। बताया कि किसी भी महिला को अपने दैनिक कार्य करने, बिमारियों की रोकथाम तथा सुरक्षित व स्वस्थ प्रसव के लिए अच्छे भोजन की आवश्यकता होती है। इस दौरान उन्होंने पीपीटी प्रजेंटेशन के माध्यम से महिला स्वास्थ्य एवं बीमारियों पर विस्तार पूर्वक परिचर्चा भी की। प्रो अरोड़ा ने बताया कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही महिलाओं को मानसिक, सामाजिक, बौद्धिक एवं संवेगात्मक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ताकि, जेंडर विभेद में स्वास्थ्य के कारण पड़ने वाले दुष्प्रभावों से समानता में पिछड़ जाने वाली महिलाओं को आगे बढ़ाया जा सके। वहीं, एसएसजे विवि की शिक्षासंकाय की विभागाध्यक्ष और वेबिनार संयोजक प्रो विजयारानी ढ़ौंडियाल ने कहा कि इस पांच दिवसीय वेबिनार का मुख्य उद्देश्य जेंडर स्टेडीज इन स्पेशल रीफ्रेंस टू एनईपी 2020 रखा गया है। ताकि, नीति नियताओं को जेंडर विभेद की खाईं को पाटा जा सके। कहा कि एक महिला घर में और बाहर काम के बोझ के तले दबी रहती है। इसलिए सबसे पहले उसको अपने स्वास्थ्य के प्रति संचेत रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस वेबिनार के माध्यम से महिला स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधित रुकावटों पर शिक्षाविदों जो गहन परिचर्चा की वह आने वाले दिनों में जरूर एक सार्थक परिणाम देगी। वहीं, वेबिनार की सह संयोजक प्रो भीमा मनराल ने कहा कि आज आधी आबादी ने शिक्षा ही नहीं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का डंका बजाया है। लेकिन, फिर भी महिलाओं की स्थिति में निश्चित ही अभी भी बहुत ही आमूलचूक बदलाव लाने की जरूरत है। कार्यक्रम के अंत में समन्वयक डॉ संगीता पवार एवं डॉ रिजवाना सिद्दीकी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का वेबिनार को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया। वेबिनार में डॉ किरण सती, डॉ प्रीति सिंह, अंकिता, कहकशा खान, विदुषी जोशी, पंकज जनौटी, माया जोशी, प्रिया बोरा, रीता दुर्गापाल, नवीन चंद्र सहित अनेक शिक्षक प्राध्यापक एवं शोधार्थियों ने प्रतिभाग किया।

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